देहरादून/हरिद्वार , अप्रैल 13 -- देश के प्राचीनतम विश्व विद्यालय उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय, में सोमवार को आयोजित वार्षिक समापन समारोह "क्रिमिनल लॉज़, सोसाइटी एवं रिस्पॉन्सिबिलिटी" विषय पर एक विशेष अकादमिक सत्र आयोजित हुआ। जिसमें शिक्षाविदों, विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों ने आधुनिक समाज में मानव व्यवहार, विधि व्यवस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच बदलते संबंधों पर गंभीर विचार-विमर्श किया।
समारोह के मुख्य वक्ता एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में कई बार पुरस्कृत, पद्मश्री प्रो डॉ. बीकेएस संजय ने स्पष्ट किया कि अपराध केवल कानूनी या न्यायिक विषय नहीं, बल्कि मूलतः मानव व्यवहार, भावनात्मक नियंत्रण और सामाजिक परिवेश से जुड़ा एक गहन मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक विषय है। उन्होंने कहा कि हर अपराध की शुरुआत मन में उत्पन्न विचार से होती है, जो क्रमशः भावना, इरादा और अंततः क्रिया का रूप ले लेता है। अतः अपराध की प्रभावी रोकथाम के लिए व्यवहारिक जागरूकता, आत्मनियंत्रण एवं मूल्य-आधारित शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अंतर्वैयक्तिक एवं अंतर्मन संबंधी बुद्धिमत्ता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि अपराधी प्रवृत्तियां प्रायः साथियों के दबाव, सामाजिक वातावरण तथा भावनात्मक असंतुलन के कारण विकसित होती हैं।
प्रो. डॉ. संजय ने कहा कि सड़क सुरक्षा मूलतः एक व्यवहारिक दायित्व है, जहां नियमों का उल्लंघन, ओवरस्पीडिंग और रोड रेज जैसी घटनाएं केवल कानूनी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन और भावनात्मक नियंत्रण की कमी का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सार्वजनिक सड़कों को साझा संसाधन के बजाय व्यक्तिगत अधिकार के रूप में देखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो सामाजिक टकराव और दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रही है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित