रांची , सितंबर 09 -- झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने गुजरात में कथित तौर पर चल रही शेल राजनीतिक पार्टियों को लेकर गंभीर सवाल उठाये।
श्री पांडेय ने दावा किया कि गुजरात में ऐसी कई गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां हैं, जिन्हें चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद करोड़ों रुपये का चंदा मिला है। उन्होंने चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किये।
हरमू स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पार्टी कार्यालय में केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गुजरात में कथित तौर पर चल रही शेल कंपनीयों के तरह ही गुजरात में शेल राजनीतिक पार्टियां है जिनमें अधिकांश के ऑफिस अहमदाबाद मे स्थित हैं।
श्री पांडेय ने कहा कि देश में 2800 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें 6 राष्ट्रीय और 67 क्षेत्रीय पार्टियां हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में शेल कंपनियों की तरह कुछ शेल पार्टियां भी काम कर रही हैं। ये पार्टियां चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इन्हें मान्यता प्राप्त नहीं है।
उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात में ऐसी करीब 10 पार्टियां हैं। इनमें 6 के कार्यालय अहमदाबाद में हैं। उनके अनुसार कई पार्टियों का कोई सक्रिय अध्यक्ष, खजांची या राजनीतिक गतिविधि नहीं है। कुछ कार्यालय बंद दुकानों या फ्लैट के बंद कमरों में चल रहे हैं। इनमें से कई पार्टियों ने कोई चुनाव भी नहीं लड़ा है।
श्री पांडेय ने दावा किया कि 2023-24 में ऐसी पार्टियों के खातों में बड़ी रकम जमा हुई। उन्होंने कहा कि किसी पार्टी के खाते में करीब 1000 करोड़ रुपये, किसी के खाते में 620 करोड़ रुपये और किसी के खाते में 950 करोड़ रुपये तक होने की जानकारी सामने आयी है। सबसे कम रकम वाली पार्टी के खाते में भी करीब 138 करोड़ रुपये होने का दावा किया गया।
लोकशाही सत्ता पार्टी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में उसे 1045 करोड़ रुपये का चंदा मिला और करीब 950 करोड़ रुपये का खर्च चुनाव आयोग और आयकर विभाग को दिखाया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा को छोड़कर किसी अन्य राष्ट्रीय पार्टी के पास इतनी बड़ी रकम नहीं है।
श्री पांडेय ने एक ऐसी पार्टी का भी जिक्र किया, जिसका कार्यालय पहले बिहार में था। पांडेय के मुताबिक पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष के भाजपा में शामिल होने और भाजपा की उपाध्यक्ष बनने के बाद पार्टी का कार्यालय गुजरात स्थानांतरित हो गया। उन्होंने बंगाल की एनसीपीआई नाम की पार्टी का भी जिक्र किया और दावा किया कि टीएमसी के 20 सांसद इसमें शामिल हुए थे और आज यह पार्टी एनडीए में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
श्री पांडेय ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम मिलने के बावजूद चुनाव आयोग और जांच एजेंसियां कार्रवाई क्यों नहीं कर रही हैं। उन्होंने पूछा कि क्या यह पैसा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और क्या इसका इस्तेमाल विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों को पैसा देने वालों की पहचान सामने आनी चाहिए। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट जाने की बात भी कही।
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