, Jan. 31 -- वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि गुजरात में नल सरोवर, थोल, खिजड़िया और वढवाणा पक्षी अभयारण्य को पहले ही रामसर साइट की मान्यता मिल चुकी है। अब, छारी-ढंढ पक्षी अभयारण्य के इस सूची में शामिल होने से राज्य की पर्यावरण संरक्षण और वेटलैंड संवर्धन की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी। राष्ट्रीय स्तर की बात करें, तो भारत में राष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कुल 115 वेटलैंड में से आठ वेटलैंड गुजरात में हैं।

राज्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सभी गुजरातियों को बधाई देते हुए कहा कि इसके अलावा, राज्य में 19 ऐसे वेटलैंड हैं, जो महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता वाले क्षेत्र के रूप में जाने जाते हैं, जो प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आश्रय स्थल मुहैया कराते हैं।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दो फरवरी, 2026 को 'विश्व वेटलैंड दिवस' से पहले उत्तर प्रदेश में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के छारी-ढंढ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने से भारत के रामसर नेटवर्क में दो नये वेटलैंड को शामिल करने की घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आज की है।

श्री मोदी के नेतृत्व में भारत का रामसर नेटवर्क 2014 में 26 स्थलों से बढ़कर वर्तमान में 98 स्थल हो गया है, जो 276 फीसदी से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता पर्यावरण संरक्षण और वेटलैंड संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कच्छी भाषा में 'छारी' का अर्थ क्षार वाली और 'ढंढ' यानी उथला सरोवर। लगभग 227 वर्ग किलोमीटर (22,700 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला यह वेटलैंड रण और घास के मैदान के बीच एक अद्भुत पर्यावास (प्राकृतिक आवास) है। इसे वर्ष 2008 में गुजरात का पहला 'कंजर्वेशन रिजर्व' घोषित किया गया था।

छारी-ढंढ में पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। सर्दियों के दौरान यहां साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप के 25,000 से 40,000 तक कॉमन क्रेन (कुंज), वेनेलस ग्रेगेरियस (संघी टिटहरी) और डालमेटियन पेलिकन स्थानांतरण करके आते हैं। इसके अतिरिक्त, लेसर फ्लेमिंगो, ग्रेटर फ्लेमिंगो और सारस भी यहां दिखाई देते हैं।

इतना ही नहीं, यहां लुप्तप्राय डालमेशियन पेलिकन, ओरिएंटल डार्टर, ब्लेक- नेक्ड स्टॉर्क और अनेक शिकारी पक्षी भी दिखाई देते हैं। केवल पक्षी ही नहीं, बल्कि यह क्षेत्र चिंकारा, रेगिस्तानी लोमड़ी (डेजर्ट फॉक्स), स्याहगोश (केरेकल), रेगिस्तानी लोमड़ी और भेड़िये जैसे अनेक वन्यजीवों का भी महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है।

इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता को प्राप्त करने में गुजरात के चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन डॉ. जयपाल सिंह, गांधीनगर वन्य प्राणी विंग की टीम, मुख्य वन संरक्षक (कच्छ फॉरेस्ट सर्कल, भुज) तथा उप वन संरक्षक कच्छ (पश्चिम) वन विभाग भुज के लगातार प्रयास और कार्य निर्णायक रहे हैं। यह उपलब्धि राज्य एवं केंद्र सरकार (वेटलैंड डिवीजन) के निरंतर मार्गदर्शन में वेटलैंड संरक्षण और इसकी जैव विविधता को बनाए रखने के लिए किए गए वैज्ञानिक प्रयासों के परिणामस्वरूप हासिल हुई है। रामसर साइट का दर्जा मिलने से छारी-ढंढ को अब वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि मिलेगी, जिससे कच्छ में इको-टूरिज्म का विकास होगा और स्थानीय रोजगार के अवसर के नये द्वार खुलेंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित