गांधीनगर , फरवरी 17 -- 'स्वस्थ धरा, खेत रहा' मंत्र के साथ लागू की गयी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत अब तक गुजरात के 2.19 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किये जा चुके हैं।
सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस समस्या के समाधान के लिए एक अभिनव दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्ष 2003-04 में 'सॉइल हेल्थ कार्ड योजना' यानी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (एसएचसी) लागू की थी। मिट्टी की सेहत की अहमियत को समझते हुए इस प्रकार की अनोखी योजना लागू करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य बन गया।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत खेती योग्य भूमि की सेहत को बरकरार रखने के लिए निर्धारित पद्धति के अनुसार किसानों के खेत से मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं और उन्हें विश्लेषण के लिए मृदा परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जाता है। जहां, नमूनों का विश्लेषण कर, सॉफ्टवेयर आधारित मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किए जाते हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिट्टी में मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों की मात्रा दर्शाता है, जिसमें वर्तमान में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, जिंक, लौह तत्व, तांबा, मैंगनीज, बोरन, पीएच (अम्लता या क्षारीयता), ईसी (विद्युत चालकता) और ओसी (कार्बनिक कार्बन) जैसे कुल 12 तत्वों की मात्रा दर्शाई जाती है।
इसके आधार पर, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए किसानों को सही रासायनिक खाद के प्रयोग और उसकी सटीक मात्रा की वैज्ञानिक सिफारिश मुफ्त में मिलती है। इस प्रक्रिया से अनावश्यक रासायनिक खादों का अत्यधिक इस्तेमाल कम होता है और भूमि की उर्वरता को बनाए रखने में सहायता मिलती है। वर्ष 2003-04 में लॉन्च की गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी) योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि की स्थिति के संबंध में व्यापक जानकारी प्रदान कर उन्हें सशक्त करना था।
एसएचसी योजना का पहला चरण 2003-04 से 2010-11 के दौरान और दूसरा चरण 2011-12 से 2015-16 के दौरान पूर्ण किया गया। पहले चरण में गुजरात के 43.03 लाख से अधिक किसानों और दूसरे चरण में लगभग 46.92 लाख से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड निःशुल्क प्रदान किए गए। वर्ष 2015-16 में देश भर में 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना' लागू की। जिसके अंतर्गत तीसरे चरण में वर्ष 2016-17 से अब तक राज्य के 1.25 करोड़ से अधिक किसानों को भारत सरकार की इस योजना के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये गये हैं। पिछले एक दशक में, इस योजना के कारण किसानों को उनके खेतों में मिट्टी की पोषक स्थिति की कमी के बारे में पता चला है, साथ ही उन्होंने सूक्ष्म पोषक तत्वों वाले उर्वरकों का उपयोग भी बढ़ाया है।
वर्ष 2024-25 में एसएचसी पोर्टल के आधार पर 6,23,844 मिट्टी के नमूने ऑनलाइन एकत्रित किए गए और 6,23,295 नमूनों का विश्लेषण किया गया। एसएचसी योजना के तहत वर्ष 2025-26 में भारत सरकार ने गुजरात के लिए 6,25,513 नमूनों के परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया है। गुजरात सरकार भी इस लक्ष्य को तय समय पर हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने अब तक 6,13,355 नमूने एकत्रित कर लिए हैं, जिनमें से 4,86,142 नमूनों का विश्लेषण पूरा हो चुका है। शेष नमूनों के परीक्षण का कार्य प्रगति पर है।
इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तथा समय पर विश्लेषण करके मृदा स्वास्थ्य कार्ड का समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयास जारी हैं। अभी गुजरात में कृषि विभाग के अंतर्गत मिट्टी के नमूनों के विश्लेषण के लिए कुल 19 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं तथा 01 सूक्ष्म तत्व परीक्षण प्रयोगशाला कार्यरत हैं। प्रत्येक प्रयोगशाला की क्षमता सालाना 10 से 11 हजार नमूनों का परीक्षण करने की है। इस क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकारी सहायता से 26 निजी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं यानी ग्राम स्तरीय प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गयी हैं। प्रत्येक निजी प्रयोगशाला भी सालाना 3,000 मिट्टी के नमूनों का परीक्षण करने के लिए तैयार है।
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