भावनगर , जनवरी 16 -- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भावनगर में 107 दिव्यांगजनों को 1.16 करोड़ रुपए की साधन सहायता का शुक्रवार को वितरण किया।
श्री पटेल ने शुक्रवार को भावनगर में दिव्यांग उपकरण सहायता वितरण शिविर के अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने दिव्यांगों का जीवन आसान और उन्नत बनाने के लिए दिव्यांगजनों के हित में अनेक निर्णय किए हैं।
भावनगर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की दिव्यांगजनों के लिए सहायक यंत्रों और उपकरणों की खरीद/फिटिंग की सहायता योजना (एडिप योजना) और गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जेटको) और पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (पीजीवीसीएल) के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के अंतर्गत एलिम्को और भावनगर जिला प्रशासन की ओर से निःशुल्क दिव्यांग साधन-उपकरण सहायता वितरण कैंप का आयोजन किया गया।
मुख्यमंत्री ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से एक ही दिन में एक साथ 1017 दिव्यांगजनों को 1.16 करोड़ रुपए की साधन सहायता वितरित करने के इस कार्यक्रम को दिव्यांग कल्याण की सरकार की प्रतिबद्धता करार दिया। उन्होंने भावनगर और बोटाद जिले में 15 दिनों तक कैंप आयोजित कर 2600 से अधिक दिव्यांगजनों को 3.51 करोड़ रुपए के 4800 से अधिक साधनों का निःशुल्क वितरण कर उनकी आत्मनिर्भरता का अहम कार्य करने के लिए केंद्रीय मंत्री निमुबेन बांभणिया और उनकी टीम को बधाई दी।
उन्होंने राज्य के दो सार्वजनिक उपक्रमों जेटको और पीजीवीसीएल की भी सीएसआर के तहत इस साधन वितरण में योगदान देने के लिए सराहना की और कहा कि गुजरात में पिछले पांच वर्ष में चार लाख से अधिक दिव्यांगों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान कर 820 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी गई है। इतना ही नहीं, दिव्यांगों को प्रमाण पत्र के लिए बार-बार मेडिकल चेकअप कराने की मुश्किलों से भी मुक्ति मिली है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र को आजीवन मान्य करने के निर्णय से दिव्यांगों को बड़ी राहत प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि अब 60 फीसदी या उससे अधिक दिव्यांगता वाले दृष्टिबाधितों को संत सूरदास योजना का लाभ दिया जाता है। ऐसे योजनाओं का लाभ आसानी से मिलने के कारण दिव्यांगजन आत्मसम्मान से जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश में दिव्यांगों का जीवन बदला और उन्हें नए अवसर प्रदान किए हैं, इस बात का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सुगम्य भारत अभियान के जरिए दिव्यांगजनों के कल्याण की दिशा में बड़ा कार्य किया है। इस अभियान के कारण देश में सरकारी कार्यालयों, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं स्थापित की गई हैं और ईज ऑफ लिविंग से उनका जीवन आसान बना है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की 'प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र' के निर्माण की पहल की चर्चा करते हुए कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क सहायक साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। देश भर में 300 दिव्याशा केंद्र बनाने का लक्ष्य है, जिनमें से 100 तो कार्यरत हो चुके हैं।
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