दरभंगा , सितम्बर 05 -- ामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान की अक्षय खान है, जो मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है।कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वाविद्यालय एवं संस्कृत भारती के संयुक्त तत्वाधान में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर दरभंगा स्थित श्री कृष्ण मंदिर में आयोजित एक विशेष 'साप्ताहिक मिलन' कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.लक्ष्मी निवास पांडे ने कहा कि गीता में न केवल आध्यात्मिक ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत समावेश है, बल्कि यह व्यावहारिक जीवन में आनंद, संतुलन और मानसिक शांति प्राप्त करने का अचूक मार्ग भी दिखाती है। उन्होंने वर्तमान समय में समाज के लिए गीता के संदेशों की अत्यधिक आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य गीता के दर्शन में ही निहित है।
कुलपति ने बताया कि इस प्रकार के साप्ताहिक मिलन कार्यक्रमों में गीता स्तोत्र एवं अन्य धार्मिक पाठों के माध्यम से समाज के हर घर तक भारतीय संस्कृति, संस्कार और नव-जागृति पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं संस्कृत भारती के जिला सहसंयोजक डॉ. अवधेश कुमार श्रोत्रिय ने साप्ताहिक मिलन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पहल में मातृशक्ति का विशेष सहयोग और सहभागिता मिल रही है। समाज और विश्वविद्यालय के इस संयुक्त प्रयास से भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन और समाज में नैतिक संस्कारों के सिंचन को एक नई दिशा मिल रही है।
इस अवसर पर संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग के डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री, डॉ. साधना शर्मा, श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, विश्वविद्यालयकर्मी अभिमन्यु, मंदिर के अर्चक श्री जगन्नाथ झा सहित छात्र-छात्राएं (प्रीति, कोमल, किरन, पूजा मिश्रा, अपराजिता, सितारा, पूजा, अंशु, यशस्विनी), विद्यालयीय छात्र एवं शहर के गणमान्य नागरिक तथा मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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