भीलवाड़ा , मई 31 -- पर्यावरणविद् एवं वन्यजीव विशेषज्ञ बाबूलाल जाजू ने गुजरात के गिर अभयारण्य में हाल में शेरों और शावकों की मौत की घटनाओं को दुखद बताते हुए केंद्र एवं गुजरात सरकार से शेरों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाकर स्थाई कदम उठाने की मांग की है।
श्री जाजू ने अपने बयान में यह मांग करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। उन्होंने मांग की कि गिर क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए विशेष मेडिकल टास्क फोर्स का गठन किया जाए तथा शेरों की नियमित स्वास्थ्य जांच की भी स्थाई व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने संक्रमण फैलाने वाले परजीवियों पर नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक एवं दीर्घकालीन कार्ययोजना बनाने की जरुरत बताई। श्री जाजू ने कहा कि केवल आपातकालीन कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए मजबूत और स्थाई नीति बनाई जानी चाहिए। साथ ही वन्यजीव चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की निगरानी में शोध और जंगल क्षेत्रों में सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए।
श्री जाजू ने शेरों की मौत के मामलों की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की ताकि लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके। उन्होंने कहा कि एशियाई शेर देश की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है।
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