बस्ती , जुलाई 18 -- ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार से गाय को पशुओं की श्रेणी से बाहर कर उसे उसके धार्मिक सम्मान के अनुरूप दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गाय को माता का स्थान प्राप्त है और उसे पशु की सूची में रखना करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के विपरीत है।
कप्तानगंज क्षेत्र में अपने यात्रा कार्यक्रम के दौरान आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि "गाय हमारी माता है। उसे पशु कहना स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि हमारी माता को कोई पशु कहे तो हम इसे कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं।"समाजवादी पार्टी के विधायक कविंद्र चौधरी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस आधार पर गोमाता को पशुओं की सूची में रखा गया है। उनका कहना था कि सनातन धर्म में गाय का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है तथा उसे उसी सम्मान के अनुरूप स्थान मिलना चाहिए।
शंकराचार्य ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इस विषय पर निर्णय नहीं लिया तो व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि गोमाता के सम्मान के लिए समाज को संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार गाय को पशु की सूची से हटाने की मांग पर ध्यान नहीं देती है, तो आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसका राजनीतिक विरोध किया जाएगा। उन्होंने लोगों से इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देने और सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाने की अपील की।
सं प्रदीपवार्ताकार्यक्रम के दौरान उपस्थित कुछ लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को जवाब देने की बात कही।
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