गाजीपुर , अप्रैल 04 -- साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गाजीपुर पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन पर देशभर में करीब 67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में संलिप्तता का आरोप है।

पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक (साइबर) और पुलिस उपाधीक्षक (साइबर अपराध) के पर्यवेक्षण में गठित टीम ने सर्विलांस और साक्ष्य संकलन के आधार पर 3 अप्रैल 2026 को लंका मैदान के सामने फुल्लनपुर तिराहे से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई थाना साइबर क्राइम में दर्ज मुकदमा संख्या 11/2026 (बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं) के तहत की गई।

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके नाम पर फर्जी (म्यूल) बैंक खाते खुलवाता था। इसके लिए आधार, पैन कार्ड और फोटो लेकर एमएसएमई प्रमाणपत्र व जीएसटी नंबर के जरिए करंट अकाउंट खोले जाते थे। इसके बाद टेलीग्राम के माध्यम से इन खातों की पूरी जानकारी यूजर आईडी, पासवर्ड, रजिस्टर्ड मोबाइल और ईमेल गिरोह के अन्य सदस्यों को भेजी जाती थी। साथ ही एपीके फाइल इंस्टॉल कराकर ओटीपी और बैंक मैसेज अपने पास हासिल कर लेते थे।

गिरोह क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसे बाइनेंस, कूक्वाइन आदि के माध्यम से ठगी की रकम का लेन-देन करता था और कमीशन क्रिप्टोकरेंसी में लिया जाता था। जांच में सामने आया कि गिरोह के पास 700 से अधिक म्यूल खाते थे। आरोपियों के मोबाइल की जांच में एनसीआरपी पोर्टल पर देश के विभिन्न राज्यों से 75 से अधिक शिकायतें दर्ज मिलीं, जिनमें करीब 67 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख है।

पूछताछ में आरोपी सचिन सिंह ने करीब 2.5 करोड़ रुपये और रोहन ने लगभग 1.75 करोड़ रुपये साइबर ठगी से अर्जित करने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने बताया कि इस गिरोह ने करीब दो दर्जन खातों के माध्यम से लेन-देन किया है। सभी मामलों का गहन विश्लेषण कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में साइबर मुख्यालय लखनऊ और गृह मंत्रालय को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते, दस्तावेज या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित