नयी दिल्ली , जून 01 -- राष्ट्रीय राजधानी के गाज़ीपुर स्थित कागज़ बाज़ार में प्रस्तावित कचरा प्रसंस्करण केंद्र का विरोध के खिलाफ व्यपारी सड़कों पर उतर आए हैं।
इस संबंध में सोमवार को व्यापारियों की यहां एक बैठक हुई, कचरा निस्तारण एवं प्रसंस्करण का विरोध करने का फैसला लिया गया। एकीकृत माल ढुलाई परिसर (आईएफसी) गाज़ीपुर कल्याण संघ के नेतृत्व में सोमवारक आयोजित आम सभा की बैठक व्यापारियों और जमीनों के मालिकों ने कहा कि जिस क्षेत्र को एक आधुनिक और विश्वस्तरीय व्यवसायिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, उसे कचरा निस्तारण एवं प्रसंस्करण ढांचे का केंद्र बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बैठक में उपस्थित व्यापारियों ने कहा कि गाज़ीपुर कागज़ बाज़ार केवल एक बाजार नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका और वर्षों की मेहनत से तैयार किया गया एक संगठित व्यापारिक केंद्र है। उन्होंने चिंता जताई कि क्षेत्र के निकट प्रस्तावित कचरा प्रसंस्करण एवं बायोगैस उत्पादन परियोजना के तहत बड़ी मात्रा में नगर निगम कचरे के प्रसंस्करण की योजना है। ऐसी गतिविधियों को एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र और आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों के निकट स्थापित करना दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। इससे क्षेत्र की पहचान, निवेश की संभावनाओं और भविष्य के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
आईएफसी गाज़ीपुर कल्याण संघ के अध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि व्यापारियों ने अपने संसाधनों और प्रयासों से इस क्षेत्र को बेहतर बुनियादी सुविधाओं वाले व्यवसायिक केंद्र के रूप में विकसित किया है। सरकार को इस क्षेत्र को कचरा प्रसंस्करण गतिविधियों से जोड़ने के बजाय इसके सौंदर्यीकरण और उन्नयन पर ध्यान देना चाहिए।
बैठक में व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि गाज़ीपुर के पुराने लैंडफिल क्षेत्र को पार्क और हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए। दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में यह कदम कहीं अधिक सकारात्मक और जनहितकारी साबित होगा।
चावड़ी बाजार संघ के पूर्व अध्यक्ष रमेश जैन ने कहा, "गाज़ीपुर कागज बाजार को एक आधुनिक व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। ऐसे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कचरा प्रसंस्करण और बायोगैस उत्पादन से जुड़ी परियोजना स्थापित करना उचित नहीं है। कागज बाजार में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री का कारोबार होता है, जबकि प्रस्तावित परियोजना में कचरा प्रसंस्करण के साथ बायोगैस उत्पादन की भी व्यवस्था की जा रही है।" उन्होंने कहा कि सुरक्षा और सार्वजनिक हित को देखते हुए इन दोनों गतिविधियों को एक-दूसरे के निकट नहीं रखा जाना चाहिए।
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