पौड़ी , जुलाई 21 -- उत्तराखंड में एक अप्रैल 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मंगलवार को विकास भवन सभागार में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायतों की भूमिका, कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन एवं वैज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ नए नियमों के व्यवहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ गांवों के निर्माण के लिए ग्राम स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है। उन्होंने सभी ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को घरों से ही कचरे का पृथक्करण करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता के बिना स्वच्छता अभियान को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती।
सीडीओ ने बताया कि प्रत्येक गांव के निकट चार रंगों के कूड़ेदान स्थापित किए जाएंगे, जिनमें अलग-अलग श्रेणी का कचरा एकत्र किया जाएगा। इसके बाद वाहनों के माध्यम से कचरे को संग्रहण एवं प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाकर वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांवों के छोटे बाजारों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाएगी तथा दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही ग्राम पंचायतों को स्थानीय स्तर पर कम्पोस्टिंग, पुनर्चक्रण और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण के दौरान एडीपीआरओ प्रदीप सुंदरियाल ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का उद्देश्य वैज्ञानिक, व्यवस्थित और तकनीक आधारित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के तहत घरों, दुकानों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। इसके तहत हरे डिब्बे में गीला एवं जैविक कचरा, नीले डिब्बे में सूखा एवं पुनर्चक्रण योग्य कचरा, लाल डिब्बे में सैनिटरी एवं घरेलू हानिकारक कचरा तथा काले डिब्बे में विशेष श्रेणी के अपशिष्ट का संग्रह किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए विभाग मोबाइल एप विकसित कर रहा है।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण, बल्क वेस्ट जनरेटर की जिम्मेदारियों तथा ग्राम पंचायतों की भूमिका के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही होटल, बड़े आवासीय परिसरों, शिक्षण संस्थानों एवं अन्य बड़े अपशिष्ट उत्पादकों के लिए अपने स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के प्रावधानों से भी अवगत कराया गया।
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