बैतूल , सितंबर 01 -- ग्रामीण क्षेत्रों में जलकर लागू करने के बाद अब सरकार गांवों में संपत्ति कर वसूलने की तैयारी कर रही है। इसके लिए ग्राम पंचायतों में संपत्तियों की मैपिंग और सर्वे का काम शुरू हो गया है। दिसंबर तक सर्वे पूरा कर जनवरी से संपत्ति कर लागू करने का प्रस्ताव है। हालांकि, जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को इस कर से राहत मिलने की संभावना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पक्के मकानों पर सालाना 500 से 1,000 रुपये तक संपत्ति कर लिया जा सकता है। वहीं कच्चे और कवेलू वाले मकानों को कर से छूट देने पर विचार किया जा रहा है। बैतूल जिले के 10 विकासखंडों में से छह जनजातीय विकासखंड हैं। इन क्षेत्रों में संपत्ति कर शून्य रखने की व्यवस्था किए जाने की संभावना है।
नई व्यवस्था के लिए ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक घरों तथा अन्य संपत्तियों की जानकारी जुटाकर उनकी मैपिंग कर रहे हैं। पंचायतों में स्ट्रीट लाइट की सुविधा वाले क्षेत्रों में बिजली कर तथा सफाई और सीवेज कर लगाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। जिले की 556 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 1,300 से अधिक गांव हैं।
सरकार पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर अन्य शुल्क लगाने की संभावनाएं भी तलाश रही है। राजधानी में हुई बैठक में पन्ना के मडला गांव का उदाहरण दिया गया, जहां पंचायत ने आने वाले वाहनों पर 50 रुपये शुल्क लगाकर सालाना ढाई से तीन लाख रुपये की आय अर्जित की।
इससे पहले जुलाई से ग्रामीण क्षेत्रों में जलकर लागू किया गया है। परिवारों से 60 से 120 रुपये प्रतिमाह तथा स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पंचायत भवन से 200 रुपये प्रतिमाह जलकर लिया जा रहा है। नए नल कनेक्शन के लिए 1,000 से 10,000 रुपये तक शुल्क निर्धारित है।
नई व्यवस्था में पानी समितियों को भी अधिक अधिकार दिए जाने की तैयारी है। अंत्योदय परिवारों, निराश्रित विधवा और दिव्यांगजन के सीमित परिवारों का जल प्रभार माफ करने, बकाया पर जुर्माना लगाने तथा नियमों का उल्लंघन होने पर कनेक्शन काटने जैसे अधिकार दिए जा सकते हैं।
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