चेन्नई , जनवरी 31 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शनिवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और लगाया कि महात्मा गांधी के प्रति नफरत और जन-कल्याण के प्रति अरुचि की वजह से केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म कर रही है।
श्री स्टालिन ने कहा कि राष्ट्रपिता के नाम पर शुरू किया गया यह 100 दिनों का ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने केंद्र के उस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया कि नयी योजना वीबी जी राम जी 125 कार्यदिवस प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने मनरेगा को छोड़ दिया है और उसकी जगह एक नयी योजना ले आये हैं, जबकि मनरेगा ने लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा दिया था।
शिवगंगा जिले के करईकुडी में आयोजित एक सरकारी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उनके मन में महात्मा गांधी के प्रति नफरत और जन-कल्याण के प्रति अरुचि है।" इस कार्यक्रम में उन्होंने एक नए कृषि एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। साथ ही टाइडल पार्क और मिनी टाइडल पार्क का शुभारंभ किया। इसके अलावा उन्होंने नयी परियोजनाओं की आधारशिला रखी और जनता को कल्याणकारी सहायता वितरित की।
उन्होंने आगे कहा, "तमिलनाडु में पिछले साल तक 65 लाख से अधिक परिवारों को मनरेगा से लाभ मिला है, जिसके तहत ग्रामीण गरीबों को वेतन के रूप में 10,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपये दिये गये। लेकिन नयी योजना के तहत यह संदिग्ध है कि इसका आधा हिस्सा भी मिल पायेगा या नहीं। इसके अलावा हम कार्यदिवसों पर निर्णय नहीं ले सकते, क्योंकि ऊपर बैठे लोग ही सब कुछ तय करेंगे।"इस दौरान उन्होंने कहा कि 'राज्यों को लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद उठाना होगा' और आगे कहा कि यह राज्यों के अधिकारों और वित्तीय स्थिति पर एक बड़ा हमला है। वीबी जी राम जी कार्यक्रम के खिलाफ अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए श्री स्टालिन ने पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर उठाये गये सवालों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "हाल के वर्षों में मनरेगा के तहत एक परिवार को दिये गये रोजगार के दिनों की औसत संख्या 50 दिन थी। ऐसा मांग की कमी के कारण नहीं, बल्कि पर्याप्त धन उपलब्ध न कराये जाने के कारण हुआ। तो फिर यह 50 दिनों का औसत जादुई रूप से बढ़कर 125 दिन कैसे हो जायेगा? यह '125 दिन' कोई गारंटी नहीं है, बल्कि एक भ्रम है। और अगर वादा ही करना है, तो 125 दिनों पर ही क्यों रुकना?"उन्होंने मंच पर मौजूद पी. चिदंबरम के बयान को उद्धृत करते हुए कहा, "यह एक खोखला वादा है, आप चाहें तो साल के 365 दिनों की गारंटी भी दे सकते हैं।" मोदी सरकार पर अपने कर्तव्यों से पीछे हटने और ग्रामीण आबादी के सशक्तीकरण से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने मांग की कि महात्मा गांधी के नाम पर मनरेगा को फिर से बहाल किया जाए।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा ने इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पारित किया है। श्री स्टालिन ने कहा कि जिस तरह तीन कृषि कानूनों और जाति जनगणना के मामले में हुआ था, केंद्र की भाजपा सरकार को इस फैसले से भी पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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