काबुल , अप्रैल 21 -- अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने गांधार सभ्यता, प्रसिद्ध लोककथा 'आदम खान-दुरखानी' और वाद्ययंत्र 'रबाब' को पाकिस्तान की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बताया था।

श्री करजई ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' के माध्यम से ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि गांधार सभ्यता का सीधा संबंध प्राचीन 'आर्याना' (प्राचीन अफगानिस्तान) से है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सभ्यता बामियान से लेकर सिंधु नदी के क्षेत्र तक फैली हुई थी और ऐतिहासिक दृष्टि से वर्तमान पाकिस्तान तथा उत्तरी भारत के कई क्षेत्रों की सभ्यता दरअसल प्राचीन अफगानिस्तान की सभ्यता का ही विस्तार है।

श्री करजई ने श्री जरदारी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि 'आदम खान और दुरखानी' की अमर प्रेम कहानी और रबाब अफगानिस्तान की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने इसके प्रमाण के तौर पर पुरानी ऐतिहासिक पुस्तकों जैसे 'मली हिंदारा', 'रिपोर्ट ऑन द किंगडम ऑफ काबुल' और आधुनिक सूचना स्रोतों का हवाला दिया।

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