जयपुर , जून 19 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मृत्यु एवं गुर्दों के काम नहीं करने के मामलों में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों-चिकित्सकों पर प्राथमिकी एवं निलंबन, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और पीड़ितों को तुरंत मुआवजा देने की मांग की हैं।
श्री गहलोत ने पत्र में दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय देने की मांग की है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट कहा है कि यह महज कोई सामान्य हादसा नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की 'संस्थागत विफलता' है। उन्होंने मामले की जांच रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने, जिम्मेदार अधिकारियों एवं डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने तथा पीड़ितों के आजीवन इलाज की सरकारी गारंटी देने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष रखी हैं।
उन्होंने पत्र में बताया कि वह स्वयं गत 17 जून को कोटा जाकर भर्ती प्रसूताओं एवं उनके परिजनों से मिला। वहां जो दृश्य देखा, वह दिल दहलाने वाला था। ये सभी अत्यंत गरीब परिवारों की बेबस महिलाएं हैं, जो सरकारी तंत्र पर भरोसा करके अस्पताल आयी थीं और जिनके इस भरोसे के साथ क्रूर धोखा हुआ है।
वहां बताया गया कि गत चार मई से अब तक डेढ़ महीने में कोटा के सरकारी अस्पताल में पांच प्रसूता माताओं की मृत्यु हो चुकी है। जांच रिपोर्ट में मृत्यु का कारण सीधे तौर पर 'इलाज में लापरवाही' बताया गया है। डॉक्टरों ने इसके वहां कोई स्पष्ट कारण नहीं बताए परन्तु मीडिया में आये समाचारों में एवं विशेषज्ञों ने सरकारी आपूर्ति की दवाओं का अमानक होना, अस्पताल के संवेदनशील हिस्सों में गंदगी एवं संक्रमण फैलना तथा डॉक्टरों द्वारा लापरवाही इसका कारण सामने आया है। पांच अन्य प्रसूताएं अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनके गुर्दे खराब है। सप्ताह में एक से तीन बार डायलिसिस हो रही है। सभी परिवार अत्यंत गरीब हैं।
उन्होंने लिखा कि एम्स की टीम ने ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण की आशंका जताई है, जो अस्पताल प्रशासन के दावों की पोल खोलता है। इसी प्रकार बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी प्रसव के पश्चात पांच प्रसूताओं की किडनी खराब हुई हैं। वहां ऑपरेशन थियेटर के पास गंदगी, संक्रमण और स्त्रीरोग विभाग के पास अलग आईसीयू का अभाव, यही कारण जांच में सामने आये हैं। प्राइवेट अस्पतालों में वही दवाएं दी गयीं, लेकिन वहां यह स्थिति नहीं बनी, यह स्पष्ट प्रमाण है कि यह सरकारी व्यवस्था की विफलता है, न कि महज दुर्भाग्यवश हादसा।
पता चला है कि एम्स एवं राज्य सरकार की जांच टीमों की रिपोर्ट आ चुकी है, परंतु उसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा। यह गंभीर रूप से चिंताजनक है। जब मृत्यु सरकारी अस्पताल में हुई हो, तो सरकार की पूर्ण जिम्मेदारी बनती है कि वह जनता के समक्ष पूरा सच रखे कि कमी दवाओं में थी, इलाज में थी, देखभाल में थी, या ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता में। जब तक कारण सार्वजनिक नहीं होंगे, न तो पीड़ितों को न्याय मिलेगा और न ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।
श्री गहलोत ने पत्र में मांग की कि इस अक्षम्य लापरवाही के लिए जिम्मेदार बड़े अधिकारियों और डॉक्टरों को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाये। इस मामले में एम्स एवं राज्य सरकार की जांच रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाये और स्पष्ट किया जाये कि मृत्यु के कारण क्या थे एवं आगे क्या कदम उठाये जा रहे हैं।
एफएसएल रिपोर्ट के लिए यदि राजस्थान में 4-6 महीने लगते हैं, तो इसे इमरजेंसी में राज्य से बाहर किसी प्रयोगशाला में भिजवाकर शीघ्र प्राप्त किया जाये जिससे कारणों का पता चल सके। मृतक प्रसूताओं के परिवारों को तथा भर्ती पीड़ित महिलाओं के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से तत्काल आर्थिक मदद दी जाये। ये परिवार अत्यंत गरीब हैं और डेढ़-डेढ़ महीने से दर-दर भटक रहे हैं।
सरकार घोषणा करे कि यदि इन पीड़ित महिलाओं की किडनी पूरी तरह खराब होती है, तो किडनी प्रत्यारोपण सहित आजीवन इलाज का शत-प्रतिशत खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। आवश्यकता पड़ने पर एम्स दिल्ली या मुंबई के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर मरीजों को वहां शिफ्ट करने में कोई संकोच न किया जाये। पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन थियेटर के संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल की तत्काल समीक्षा की जाये। राज्य सरकार यह सार्वजनिक आश्वासन दे कि कोटा एवं बीकानेर के अस्पतालों की पूरी निगरानी हो चुकी है और भविष्य में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को कोई खतरा नहीं है।
उन्होंने पत्र में कहा कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं है। यह सरकार की व्यवस्था की संस्थागत विफलता है, जिसकी कीमत निर्दोष गरीब माताओं ने अपनी जान और किडनियां देकर चुकाई है। इसे महज 'हादसा' मानकर रफा-दफा करने का कोई भी प्रयास कतई स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने पत्र में लिखा कि आशा है कि आप इस अत्यंत संवेदनशील मामले में तत्काल एवं कठोर कार्रवाई करेंगे तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाएंगे।
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