जयपुर , अप्रैल 13 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को विधानसभा भवन को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों की कुशलक्षेम पूछने विधानसभा पहुंचे।
श्री गहलोत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लगातार जो धमकियां मिल रही हैं, लगभग तमाम कलेक्ट्रेट में धमकी जा चुकी है, निचली अदाीत में भी जा चुकी थी और उच्च न्यायालय में तो बराबर न्यूज़ आ ही रही थी। अब विधानसभा तक पहुंच गए। क्या सरकार दो महीने में उनको पकड़ नहीं पाई क्या। अगर पकड़ लेती, तो यहां तक असेंबली तक पहुंचने की नौबत ही क्यों आती।
उन्होंने कहा "अब विधानसभा के दरवाज़े बंद कर रखे हैं, हम तो आए थे मिलने के लिए कर्मचारियों से कि भई, आप लोग जो है धैर्य रखें, घबराएं नहीं। अब गेट बंद है, इसलिए अंदर जा नहीं पा रहे । गेट बंद कर दिया, हमें मना कर दिया अंदर जाने से। हम इसलिए आए थे यहां पर कि कम से कम कर्मचारियों का हौसला अफजाई तो करें। बाकी सरकार अपना काम करे, कैसे इनको निष्क्रिय करना है, बम है या नहीं है, या फेक धमकी है। यह काम तो सरकार का है, हमारा काम नहीं है। हम यहां के कर्मचारियों से, अधिकारियों से मिलने आए थे कि उनको कहें भई आप धैर्य रखें, हम सब आपके साथ हैं। ये कहने आए थे।"श्री गहलोत ने कहा कि तीन-चार बार, मुख्यमंत्री खुद को भी धमकी मिली है। तो कोई बचा ही नहीं है। कलेक्ट्रेट नहीं बचा है, हाई कोर्ट नहीं बच रहा है, मुख्यमंत्री खुद नहीं बचे हैं, तब भी कोई चिंता ही नहीं है राजस्थान के अंदर। 'मुख्यमंत्री' किसे कहते हैं। हमारे राज्य का मुख्यमंत्री खुद धमकी का शिकार हो रहा है और उनकी पुलिस पकड़ नहीं पा रही किसी को। मुख्यमंत्री खुद को, हाई कोर्ट को, लोअर कोर्ट को, कलेक्ट्रेट को, क्या बच गया बताइए आप। कानून व्यवस्था की स्थिति तो बहुत बुरी बिगड़ी हुई है।
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