वाराणसी , सितंबर 7 -- उत्तर प्रदेश में एससी/एसटी एक्ट से जुड़े वर्ष 2018 के एक मुकदमे में गवाही के लिए बार-बार तलब किए जाने के बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर तत्कालीन विवेचक एवं वर्तमान में कौशांबी के क्षेत्राधिकारी (ट्रैफिक) सत्येंद्र प्रसाद तिवारी के खिलाफ विशेष न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।

विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) सुधाकर राय की अदालत ने पुलिस अधिकारियों को श्री तिवारी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को न्यायालय के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही अग्रिम आदेश तक उनके वेतन के आहरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक कुमार दुबे ने सोमवार को बताया कि यह आदेश एक सितंबर को पारित किया गया था, जो सोमवार को मीडिया के संज्ञान में आया। उन्होंने बताया कि मामला सत्र परीक्षण संख्या-401/2018, राज्य बनाम तौफीक आलम अंसारी से संबंधित है। मामले में तत्कालीन विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी और चिकित्सक साक्षी की गवाही होनी है।

अदालत के आदेश के अनुसार, विवेचक को 13 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से साक्ष्य के लिए तलब किया गया था, लेकिन वह तिरंगा यात्रा में ड्यूटी के कारण उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उन्हें 24 अगस्त को पुनः वीसी के माध्यम से गवाही के लिए बुलाया गया, लेकिन वह उस दिन भी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए।

न्यायालय ने इसके बाद एक सितंबर को साक्ष्य के लिए तिथि निर्धारित की, लेकिन विवेचक फिर भी उपस्थित नहीं हुए। अदालत ने लगातार गैरहाजिरी को गंभीरता से लेते हुए आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षी जानबूझकर साक्ष्य देने के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहा है।

विशेष न्यायालय ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर को न्यायालय में पेश किया जाए। साथ ही आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

अदालत ने चीफ ट्रेजरी ऑफिसर को भी निर्देशित किया है कि अग्रिम आदेश तक श्री तिवारी के वेतन का आहरण रोक दिया जाए। आदेश की प्रति अनुपालन के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित माध्यमों से भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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