दुबई , मई 16 -- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने गवर्नेंस से जुड़ी खामियों के बाद क्रिकेट कनाडा की फंडिंग रोक दी है। कनाडा के खोजी डॉक्यूमेंट्री कार्यक्रम द फिफ्थ इस्टेट ने आईसीसी की नीतियों के उल्लंघन, बोर्ड के शासकीय और आधिकारिक नियंत्रण की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।
हाल के दिनों में कनाडाई क्रिकेट मैदान के अंदर और बाहर, दोनों ही मोर्चों पर गहरे संकट से गुजरा है। हालिया टी-20 विश्व कप में कनाडा और न्यूज़ीलैंड के बीच हुए मुक़ाबले की जांच आईसीसी की भ्रष्टाचार निरोधक ईकाई कर रही है।
इसके अलावा एक और एसीयू जांच भी चल रही है, जो कनाडा के तत्कालीन कोच खुर्रम चौहान की एक लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ी है। पिछले साल सामने आए इस ऑडियो में दावा किया गया था कि क्रिकेट कनाडा के कुछ तत्कालीन सीनियर अफ़सरों ने नेशनल टीम में चहेते खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए कोच पर दबाव बनाया था। इस लीक ऑडियो में मैच फिक्सिंग के प्रयास के आरोप भी शामिल थे।
पिछले एक साल में कनाडाई क्रिकेट को कई प्रशासनिक झटके भी लगे हैं। सबसे बड़ा विवाद पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलमान ख़ान की नियुक्ति और फिर उन्हें पद से हटाए जाने को लेकर हुआ। उनकी बहाली पर आईसीसी ने इसलिए उंगली उठाई थी क्योंकि उन्होंने अपने पुराने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। बाद में कैलगरी पुलिस ने उन पर चोरी और धोखाधड़ी का केस भी दर्ज किया। हालांकि सलमान इन आरोपों को ख़ारिज करते रहे हैं। वहीं अप्रैल के महीने में अमजद बाजवा की जगह अरविंदर खोसा को अंतरिम बोर्ड अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।
आईसीसी ने पिछले सप्ताह 9 और 10 मई को हुई क्रिकेट कनाडा की सालाना आम बैठक (एजीएम) के तुरंत बाद यब फ़ैसला लिया है। इस बैठक में बोर्ड ने दावा किया था कि वह "गवर्नेंस ट्रांसफ़ॉर्मेशन इनिशिएटिव" के तहत सुधारों को लागू कर रहा है। इसी बैठक में 9 सदस्यों वाले नए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का चुनाव हुआ, जिसमें खोसा को अंतरिम कार्यकाल के बाद फुल-टाइम अध्यक्ष चुन लिया गया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित