बेंगलुरु , फरवरी 19 -- कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि गलत सूचना अधिनियम का मसौदा अभी बन रहा है और इसे अगले विधानसभा सत्र या उसके बाद लाये जाने की उम्मीद है।

श्री परमेश्वर ने बताया कि इस प्रक्रिया में ज़्यादा समय लग रहा है, क्योंकि राज्य के कानून को केंद्र सरकार के कानून के साथ संरेखित होना चाहिए। प्रस्तावित कानून का मकसद गलत सूचना और फर्जी खबरों को फैलने से रोकना है, जिसमें ऐसा ऑनलाइन कंटेंट भी शामिल है, जो सामाजिक सौहार्द के खतरा पैदा करता है या लोगों की भावना को नुकसान पहुंचाता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक गलत सूचना एवं फर्जी समाचार विधेयक, 2025 का मसौदा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत या मनगढ़ंत कंटेंट के फैलाव को आपराधिक करने की कोशिश करता है, जिसमें सात साल तक की जेल और अपराधियों के लिए 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान शामिल है। ऐसे अपराधों की तेज़ी से सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित की जाने की उम्मीद है।

इस मसौदे की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर और डिजिटल अधिकार संगठनों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि इसके बड़े और साफ़ न होने वाले प्रावधान कानून सम्मत और उचित अभिव्यक्ति को रोक सकते हैं और अधिकारियों को कंटेंट को झूठी खबर के तौर पर वर्गीकृत करने के लिए काफी शक्ति दे सकते हैं। उन्होंने बोलने की आज़ादी और सही प्रक्रिया के अधिकारों की रक्षा के लिए साफ़ परिभाषाओं और सुरक्षा उपायों की मांग की है।

राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि विधानसभा में औपचारिक रूप से पेश किये जाने से पहले इस कानून को ध्यान से जांचा जाएगा और यह केंद्रीय कानूनों के हिसाब से होगा।

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