चंडीगढ़ , अक्टूबर 08 -- पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने केंद्रीय बजट 2027-28 में गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए योगदान करने वाले करदाताओं को सीमित कर-क्रेडिट देने की योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इस संबंध में गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र भेजा है।
श्री सिद्धू ने प्रस्ताव दिया है कि पंजीकृत स्कूल-छात्रवृत्ति ट्रस्टों को दिये गये योगदान पर आयकर में एक निश्चित सीमा तक क्रेडिट दिया जाए। यह सुविधा पुरानी और नयी, दोनों कर व्यवस्थाओं में उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है। ट्रस्टों के लिए कम से कम 90 प्रतिशत राशि छात्रवृत्ति के रूप में खर्च करना और सालाना स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है, लेकिन राज्यों द्वारा स्कूलों को समय पर प्रतिपूर्ति नहीं किए जाने से योजना प्रभावित हो रही है। उन्होंने पंजाब और चंडीगढ़ में प्रतिपूर्ति से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।
श्री सिद्धू ने शिक्षा मंत्रालय से हर वर्ष राज्यवार और केंद्रशासित प्रदेशवार आरटीई के तहत दाखिल बच्चों की संख्या, स्कूलों द्वारा मांगी गई प्रतिपूर्ति और वास्तव में किये गये भुगतान का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के साथ 2026-27 सत्र के लिए प्रतिपूर्ति की व्यवस्था का मुद्दा उठाने का भी आग्रह किया। उन्होंने अमेरिका में हाल में शुरू की गई स्कूल-च्वाइस कर-क्रेडिट व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि भारत में भी ऐसा मॉडल गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए निजी योगदान को प्रोत्साहित कर सकता है। उनके अनुसार, यदि पांच लाख करदाता औसतन 15,000 रुपये का योगदान करें तो करीब 750 करोड़ रुपये की कर-रियायत के माध्यम से 2.5 लाख बच्चों को 30,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जा सकती है।
श्री सिद्धू ने कहा कि प्रस्तावित योजना में दानदाता को किसी बच्चे का चयन करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए और इसे तीन साल के लिए लागू कर समीक्षा का प्रावधान रखा जा सकता है।
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