नयी दिल्ली , जून 23 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने देश में बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से गरीब परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
डॉ. नरेश कुमार ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार लगातार अर्थव्यवस्था के मजबूत होने, सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में वृद्धि और विकास के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी की जेब लगातार खाली होती जा रही है और उसकी बचत लगभग समाप्त हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि देश की जीडीपी बढ़ी है तो क्या आम आदमी की बचत भी बढ़ी है? आज हर घर का बजट बिगड़ चुका है। सब्जियां, दूध, गैस सिलेंडर, बिजली के बिल, बच्चों की शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लगातार महंगा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग एक तरफ टैक्स का बोझ उठा रहा है और दूसरी तरफ महंगाई की मार भी झेल रहा है, जबकि गरीब परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। कुछ साल पहले दूध लगभग 52 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध था, जो अब 72 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं सरसों का तेल 120 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 200 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह आटे की कीमत 28 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 42 रुपये, चावल 40 रुपये से बढ़कर 70 रुपये और देसी घी 350 रुपये प्रति किलो से बढ़कर लगभग 650 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि गरीब आदमी की थाली लगातार छोटी होती जा रही है, जबकि सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों और दावों के जरिए विकास की तस्वीर पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है कि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, लेकिन जनता महसूस कर रही है कि उसकी जेब कमजोर हो रही है। महंगाई ने रसोई का खर्च इस कदर बढ़ा दिया है कि हर परिवार का मुखिया घर का बजट संभालने को लेकर चिंतित है।
उन्होंने कहा कि रोजगार स्थिर नहीं है, आय सीमित है और खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में हर परिवार की बचत प्रभावित हो रही है और लाखों परिवार आर्थिक दबाव में जीने को मजबूर हैं। महंगाई अब केवल एक आर्थिक शब्द नहीं रह गई है, बल्कि हर घर के लिए रोजमर्रा का संघर्ष बन चुकी है।
डॉ. नरेश कुमार ने उन्होंने कहा कि सरकार आंकड़ों में राहत दिखा रही है, लेकिन जनता बाजार में महंगाई देख रही है। जब घर का बजट टूटता है तो सरकार के विकास और खुशहाली के दावे कमजोर पड़ जाते हैं। विकास का वास्तविक पैमाना केवल आंकड़े नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आने वाली सहजता और आर्थिक स्थिरता है।
उन्होंने कहा, "सरकार कहती है कि जीडीपी बढ़ गई है, लेकिन जनता कहती है कि किराने का बिल बढ़ गया है। लोग हमसे पूछते हैं कि तरक्की का सबूत क्या है? हम उन्हें अपना खाली बटुआ दिखा देते हैं।
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