बैतूल , मई 15 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के युवा धावक प्रह्लाद डहाके को अब रिलायंस फाउंडेशन का सहयोग मिलने से उनके ओलंपिक सपने को नई मजबूती मिली है। आर्थिक अभावों के बीच खेत में स्वयं ट्रैक बनाकर अभ्यास करने वाले प्रह्लाद की सफलता संघर्ष और संकल्प की मिसाल बन गई है।
भैंसदेही तहसील के ग्राम ठेमगांव निवासी प्रह्लाद अत्यंत साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। सीमित संसाधनों के कारण उनके लिए खेल सामग्री, स्पोर्ट्स शूज और प्रशिक्षण सुविधाएं जुटाना संभव नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। संसाधनों के अभाव में उन्होंने अपने खेत में ही दौड़ने के लिए अस्थायी ट्रैक तैयार किया और लंबे समय तक नंगे पैर अभ्यास किया। लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई।
अब रिलायंस फाउंडेशन ने उनकी प्रतिभा और संघर्ष को देखते हुए उन्हें प्रायोजित करने का निर्णय लिया है। फाउंडेशन की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत बोला ने उन्हें औपचारिक चयन पत्र सौंपा। इस सहयोग के तहत प्रह्लाद को प्रशिक्षण, पोषण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रह्लाद का लक्ष्य ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि उचित मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर वे देश के शीर्ष धावकों में शामिल हो सकते हैं।
हाल ही में उन्होंने चेन्नई में आयोजित इंडियन नेशनल सीरीज-6 की 100 मीटर स्पर्धा में 10.77 सेकंड का समय निकालते हुए अखिल भारतीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया। इस प्रतियोगिता में वे मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने फेडरेशन चैंपियनशिप-2026 और इंटरस्टेट चैंपियनशिप-2026 के लिए भी क्वालिफाई किया है। इससे पहले पंजाब के संगरूर में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वे 100 मीटर दौड़ में पांचवें स्थान पर रहे थे।
जानकारों के अनुसार आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन की स्थिति में उन्हें त्रिवेंद्रम अथवा बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। कॉमनवेल्थ खेलों के क्वालिफिकेशन मानक के लिहाज से भी प्रह्लाद काफी करीब पहुंच चुके हैं। जानकारी के अनुसार 100 मीटर दौड़ में उन्हें केवल 50 माइक्रोसेकंड का सुधार करना है, जबकि लंबी कूद में वे निर्धारित मानक से 73 सेंटीमीटर पीछे हैं। प्रह्लाद डहाके की उपलब्धि ने यह साबित किया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। बैतूल सहित पूरे प्रदेश के खेलप्रेमियों ने उनकी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित