गरियाबंद , मार्च 19 -- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। कमार जनजाति के 60 वर्षीय मनू राम को तब गंभीर हालत में खाट पर लादकर करीब 17 किलोमीटर पैदल पहाड़ों से नीचे लाना पड़ा, जब उन्हें समय पर एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल सकी। इस घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गुरुवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह मनू राम अचानक बेसुध होकर गिर पड़े। उनकी हालत बिगड़ने पर परिजनों ने प्रशासन से तत्काल मदद की कोशिश की लेकिन दुर्गम इलाके और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते कोई साधन उपलब्ध नहीं हो पाया। मजबूरी में परिवार और ग्रामीणों ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें खाट में डालकर कुल्हाडीघाट पंचायत मुख्यालय तक पहुंचाया।

यहां पहुंचने के बाद भी एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी। अंततः परिजनों को निजी वाहन की व्यवस्था कर मनू राम को मैनपुर सरकारी अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया।

चिकित्सक डॉ. हरीश चौहान के अनुसार, मनू राम को दोपहर करीब 1:30 बजे भर्ती किया गया। जांच में सामने आया कि उन्हें स्ट्रोक आया है, जिससे उनके शरीर के दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया है। फिलहाल चिकित्सकों की टीम उनका उपचार कर रही है।

घटना से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें मरीज को खाट में लादकर पहाड़ से नीचे ले जाते हुए देखा जा सकता है। इसने एक बार फिर दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में एंबुलेंस सेवा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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