गरियाबंद , अक्टूबर 10 -- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की विशेष त्वरित न्यायालय ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म से जुड़े मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है,जिसकी जानकारी आज दी गई । न्यायालय ने 13 गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला सुनाया।

न्यायालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशेष न्यायाधीश गंगा पटेल ने मुख्य आरोपी रमजान खान को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा छह के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं, सहआरोपी अब्दुल रहमान को पॉक्सो अधिनियम की धारा 18 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। दोनों दोषियों को अन्य संबंधित धाराओं में भी दंडित किया गया है।

अभियोजन के अनुसार, घटना 13 सितंबर 2026 की है। देवभोग थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के रात में घर से लापता होने पर परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू की। कार्रवाई के दौरान उसी शाम नाबालिग को आरोपी रमजान खान के मित्र अब्दुल रहमान के घर से बरामद किया गया।

अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि घटना की रात नाबालिग घर से बाहर निकली थी। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर उसके मुंह में गमछा ठूंसकर उसे बेहोश कर दिया और मोटरसाइकिल से अपने साथ ले गए। आरोप था कि इसके बाद रमजान खान ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और उसे अब्दुल रहमान के घर में रखा।

पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करते हुए आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पक्ष रखा।

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