अमरोहा , मई 30 -- केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को वापस लिए जाने के फैसले का किसान संगठनों ने पुरजोर स्वागत किया है। भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के राष्ट्रीय सचिव सुमित नागर ने इस निर्णय को देश के करोड़ों गन्ना किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ी ऐतिहासिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसानों की एकजुटता, लोकतांत्रिक हस्तक्षेप और निरंतर संघर्ष का सीधा परिणाम है, जिसने साबित कर दिया है कि किसानों की लोकतांत्रिक आवाज और तथ्यपरक आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उल्लेखनीय है कि इस प्रस्तावित मसौदे के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा लगातार आवाज उठाई जाती रही थी। किसान संगठनों का कहना था कि प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश जमीनी स्तर पर किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, छोटे खंडसारी एवं कोल्हू उद्योगों के साथ-साथ बाजार प्रतिस्पर्धा पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से एथेनॉल को मुख्य उत्पाद की श्रेणी में शामिल करने, चीनी मिलों के बीच की न्यूनतम दूरी को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने, जिससे किसानों पर अतिरिक्त ढुलाई खर्च का बोझ बढ़ता, तथा राज्यों के 'स्टेट एडवाइज्ड प्राइस' (एसएपी) निर्धारण के अधिकारों को सीमित करने जैसे किसान-विरोधी प्रावधानों का कड़ा विरोध किया गया था।
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