रायपुर , सितंबर 09 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गणेश उत्सव से पहले भगवान गणेश की प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मोवा क्षेत्र में छह पैक्स और डायनासोर के आकार में तैयार की जा रही गणेश प्रतिमाओं पर संत समाज और बजरंग दल ने आपत्ति जताते हुए शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।
संत समाज के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी राजेश्वरानंद और छत्तीसगढ़ बजरंग दल के संयोजक भूषण साहू समेत अन्य सदस्य मोवा क्षेत्र में मूर्तिकारों की दुकानों पर पहुंचे और वहां तैयार की जा रही प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कुछ प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर मूर्तिकारों से चर्चा की और धार्मिक मान्यताओं तथा परंपराओं के अनुरूप प्रतिमाएं बनाने की बात कही।
संत समाज और बजरंग दल के सदस्यों का कहना है कि भगवान गणेश की प्रतिमा लोगों की आस्था से जुड़ी है, इसलिए उनके मूल और पारंपरिक स्वरूप का ध्यान रखा जाना चाहिए। नए प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि धार्मिक भावनाएं आहत न हों।
स्वामी राजेश्वरानंद ने कहा कि गणेश जी के मूल स्वरूप में बदलाव को लेकर पहले भी आपत्ति सामने आ चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की मूर्तियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संत समाज सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।
हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वादिनी पांडेय ने कहा, "हमने मूर्तिकारों और समितियों से निवेदन किया है कि पिछले साल की तरह कहीं पर भी गणेश जी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई प्रतिमा स्थापित न करें।"मूर्तिकारों का कहना है कि पिछले वर्ष रायपुर के लाखे नगर में एक गणेश प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विवाद के बाद वे ऐसे डिजाइन से बच रहे हैं, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत होने या विवाद की आशंका हो। पिछले साल हिंदू संगठनों ने वहां स्थापित प्रतिमा के डिजाइन पर आपत्ति जताई थी। मामला विरोध प्रदर्शन और पुलिस शिकायत तक पहुंचा था।
मूर्तिकार यशवंत ने बताया कि एआई से बनी तस्वीरें आकर्षक लगती हैं, लेकिन पूजा के लिए प्रतिमा बनाते समय धार्मिक मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है। इसलिए वे ऐसे डिजाइन नहीं बनाते, जिन पर बाद में विवाद की आशंका हो। हालांकि मूर्तिकारों के पास ग्राहक एआई से तैयार तस्वीरें लेकर भी पहुंच रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता विराट वर्मा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म, देवी-देवता या धार्मिक प्रतीक का अपमान करता है अथवा ऐसा कार्य करता है जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस जांच करती है और प्रथम दृष्टया मामला बनने पर एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाती है।
इतिहासकारों के अनुसार रायपुर में सार्वजनिक गणेश उत्सव का इतिहास करीब 125 साल पुराना है। सबसे पहले पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी और बनियापारा में सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। बाद में गोलबाजार, सदर बाजार, रामसागरपारा सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में भी गणेश उत्सव समितियां बनने लगीं।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी गणेश उत्सव धार्मिक आयोजन के साथ लोगों को एकजुट करने और राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम बना था।
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