अलवर , नवम्बर 01 -- महज 21 साल की उम्र में, हाथों में किताबें और आंखों में गांव की तस्वीर बदलने का सपना संजोए राजस्थान के अलवर जिले की प्रेरणा सिंह ने नई मिसाल कायम की है। रैणी पंचायत समिति की गढ़ ग्राम पंचायत से सबसे युवा सरपंच चुनी गईं प्रेरणा अब पढ़ाई के साथ गांव की जिम्मेदारी भी संभालेंगी।
जयपुर में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई करीब पूरी कर चुकीं प्रेरणा ने पढ़ाई के साथ राजनीति में कदम रखा और सरपंच पद के चुनाव में 387 मतों से शानदार जीत दर्ज करके गांव की सबसे युवा सरपंचों में अपनी जगह बनाई है।
प्रेरणा के लिए राजनीति कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। उनके पिता तेजवीर सिंह वर्ष 2015 में गांव के सरपंच रह चुके हैं। बचपन से ही घर में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का माहौल देखने के कारण उनकी रुचि भी जनसेवा की तरफ बढ़ती गई। परिवार में नाना-नानी भी सरपंच रह चुके हैं। इस बार सरपंच पद की सीट महिला के लिए आरक्षित हुई तो प्रेरणा को अपनी सोच और संकल्प को जमीन पर उतारने का अवसर मिला। परिवार के सहयोग और गांववासियों के विश्वास ने उनके हौसले को और मजबूत किया।
प्रेरणा बताती हैं कि जयपुर में पढ़ाई के दौरान जब भी गांव आना होता था तो आसपास के दूसरे विकसित गांवों को देखकर अपने गांव की स्थिति पर विचार करती थीं। गांव में अच्छी सड़कें नहीं हैं, कई जगह नालियों का अभाव है, साक्षरता की स्थिति बेहतर नहीं है और रोजगार के अवसर भी सीमित हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनके पिता के सरपंच रहने के दौरान गांव में काफी विकास हुआ था, लेकिन पिछले कार्यकाल में विकास की गति काफी धीमी हो गई। यही परिस्थितियां उन्हें चुनाव मैदान में उतरने के लिए प्रेरित करती रहीं। मेडिकल क्षेत्र में पढ़ाई करने का उद्देश्य भी लोगों की मदद करना है और राजनीति के माध्यम से भी वह अधिक से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाना चाहती हैं।
नई सरपंच प्रेरणा की प्राथमिकताओं में महिला शिक्षा और युवाओं का भविष्य सबसे ऊपर है। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र में अब भी कई परिवार लड़कियों को पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में भेजने में सहज महसूस नहीं करते। ऐसे में गांव में ही लाइब्रेरी स्थापित करवाई जाए, जहां लड़कियां और बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकें। वह चाहती हैं कि महिलाओं को सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी मिले और योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचे। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद कई बार महिलाओं की वास्तविक समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। एक महिला होने के नाते वह इन समस्याओं को बेहतर तरीके से समझती हैं।
प्रेरणा के विकास के एजेंडे में केवल अपना गांव ही नहीं, बल्कि पूरी ग्राम पंचायत के सभी गांव शामिल हैं। वह बताती हैं कि पंचायत के दूसरे दो गांवों में सड़क और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और भी खराब है। मुस्लिम समुदाय के लिए कब्रिस्तान के पास पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने की समस्या का समाधान भी उनकी प्राथमिकताओं में है। इसके साथ ही ऐतिहासिक सालार बाबा धाम का विकास और वहां आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना उनका विशेष लक्ष्य है। वह युवाओं और 'जनरेशन जी' को साथ लेकर गांव के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती हैं।
प्रेरणा का एक छोटा भाई है, जो बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। खुद प्रेरणा भी फिजियोथेरेपी की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के दौर में हैं। ऐसे में उनके सामने पढ़ाई और पंचायत की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी रहेगी। प्रेरणा ने कहा कि गांव की जनता ने जिस भरोसे और प्यार के साथ उन्हें चुना है, वह उस विश्वास पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगी और गांव के विकास के लिए जरूरी संसाधन सरकार से उपलब्ध करवाने के लिए लगातार प्रयास करती रहेंगी।
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