रायपुर , सितंबर 16 -- छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग में वर्ष 2021 और 2022 में आयोजित सीमित भर्ती परीक्षा के माध्यम से वाणिज्यिक कर निरीक्षक बने 42 कर्मचारियों को अब उनके मूल लिपिक पद पर वापस भेजा जाएगा। परीक्षा और चयन प्रक्रिया की जांच में उत्तर-पुस्तिकाओं, मूल्यांकन, उपस्थिति रिकॉर्ड और आरक्षण प्रक्रिया सहित विभिन्न स्तरों पर गड़बड़ियां सामने आने के बाद राज्य कर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने परीक्षा तथा उसके आधार पर हुए चयन को रद्द कर दिया है।

आज मिली विभागीय जानकारी के अनुसार लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को सीमित भर्ती परीक्षा के जरिए वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाया गया था। वर्ष 2021 और 2022 में हुई इस परीक्षा को लेकर शिकायतें मिलने के बाद इसकी जांच कराई गई। जांच समिति की रिपोर्ट में परीक्षा की निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

जांच में कई चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे उत्तर पाए गए। जीएसटी की धाराओं और नियमों से जुड़े प्रश्नों के उत्तरों में समानता के साथ कुछ उत्तर मॉडल आंसर से भी काफी हद तक मिलते पाए गए। गणित के कुछ प्रश्नों में बिना रफ वर्क के सीधे उत्तर लिखे होने की बात सामने आई। डॉ. खूबचंद बघेल की जीवनी पर पूछे गए निबंध में भी कुछ चयनित अभ्यर्थियों के उत्तर एक जैसे पाए जाने की बात जांच में सामने आई है।

समिति को परीक्षा केंद्र की उपस्थिति पंजी भी नहीं मिली। इसके कारण परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की उपस्थिति की पुष्टि करने वाला मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका। वर्ष 2021 और 2022 की परीक्षाओं में उपयोग की गई उत्तर-पुस्तिकाओं का पूरा रिकॉर्ड भी नहीं मिला। खरीदी गई, इस्तेमाल की गई और शेष बची उत्तर-पुस्तिकाओं की संख्या में भी अंतर पाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा की समेकित अंक तालिका तैयार नहीं की गई थी। इसके चलते किस अभ्यर्थी को कितने अंक मिले और मेरिट सूची किस आधार पर तैयार की गई, इसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। उत्तर-पुस्तिकाओं में ऐसी कोडिंग व्यवस्था भी नहीं अपनाई गई थी, जिससे मूल्यांकन के दौरान अभ्यर्थी की पहचान गोपनीय रखी जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया गया और इसके बाद कुछ चयनित अभ्यर्थियों के अंक बढ़े। बढ़े हुए अंकों के आधार पर वे चयन सूची में शामिल हुए। जांच में यह भी कहा गया है कि पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में चयन समिति से जुड़े अधिकारी शामिल थे।

आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भी जांच में खामियां सामने आई हैं। परीक्षा से पहले पदों का आरक्षण रोस्टर के अनुसार वर्गवार बंटवारा नहीं किया गया था। किस वर्ग के लिए कितने पद निर्धारित किए गए हैं, इसका निर्धारण तय प्रक्रिया के मुताबिक नहीं होने से पात्र कर्मचारियों को समान अवसर देने की व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही गई है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य कर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने वर्ष 2021 और 2022 की सीमित भर्ती परीक्षा तथा उसके आधार पर किए गए चयन को रद्द करने का आदेश जारी किया है। इसके फलस्वरूप वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाए गए सभी 42 कर्मचारियों को उनके मूल लिपिक पद और मूल पदस्थापना पर वापस भेजा जाएगा।

सीमित भर्ती परीक्षा की चयन समिति में तत्कालीन अपर आयुक्त कल्पना तिवारी, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त और वर्तमान अपर आयुक्त टीआर धुर्वे तथा सहायक आयुक्त रौशन सिंह शामिल थे। भर्ती के समय विभाग के आयुक्त समीर विश्नोई थे।

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