लुधियाना , जून 08 -- गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (गडवासू), लुधियाना द्वारा सोमवार को पालतू पशुओं और पशुधन में रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के व्यावहारिक पहलुओं पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।

पशु चिकित्सा विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में पंजाब पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सा अधिकारियों, विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पशु चिकित्सा विभाग की प्रमुख डॉ सुषमा छाबड़ा ने कहा कि पशु चिकित्सा आपातकालीन सेवाओं में रक्त आधान को जीवन रक्षक उपाय के रूप में तेजी से स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं, शल्य चिकित्सा, परजीवी संक्रमण, विषाक्तता, रक्तस्रावी रोगों तथा एनीमिया जैसी स्थितियों में गंभीर रक्त हानि होने पर पशुओं को तत्काल रक्त आधान की आवश्यकता पड़ती है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ जे पी एस गिल ने कहा कि पशु चिकित्सकों को उन्नत नैदानिक कौशल से लैस करने के लिए इस प्रकार के क्षमता-विकास कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा और गहन चिकित्सा सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में आधुनिक निदान और उपचार तकनीकों का प्रशिक्षण पशु कल्याण और पशुधन उत्पादकता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इसमें रक्तदाता का चयन, रक्त संग्रह तकनीक, रक्त समूह निर्धारण, क्रॉस-मैचिंग प्रक्रियाएं, रक्त उत्पादों का भंडारण, हैंडलिंग प्रोटोकॉल तथा सुरक्षित रक्त आधान प्रक्रियाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी।

रक्त आधान सुविधा की प्रभारी डॉ सुजाता तुर्कर ने पालतू पशुओं के लिए स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्वस्थ वयस्क कुत्तों के मालिकों से अपने पालतू पशुओं को स्वैच्छिक रक्तदाता के रूप में पंजीकृत कराने की अपील की, ताकि जरूरतमंद पशुओं को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके।

पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के डीन डॉ स्वर्ण सिंह रंधावा ने पशु चिकित्सालयों में रक्त आधान सेवाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सही रक्त आधान प्रोटोकॉल अपनाने से जटिलताओं को कम किया जा सकता है और उपचार के बेहतर परिणाम सुनिश्चित किये जा सकते हैं। उन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारियों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग राज्यभर में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए करने का आह्वान किया।

कार्यशाला के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक रक्त आधान तकनीकों के प्रभावी उपयोग से पशुओं की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को नयी मजबूती मिलेगी और गंभीर परिस्थितियों में पशुओं की जान बचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

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