अमरोहा , फरवरी 20 -- उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिले के गजरौला औद्योगिक क्षेत्र में दूषित जल और प्रदूषित वातावरण को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। किसान नेताओं का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से जारी पर्यावरणीय संकट अब युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है और 'इको एंजायटी' जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-09 किनारे शहबाजपुर डोर गांव में पिछले दो माह से अधिक समय से किसान धरने पर बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि कैमिकल कारखानों से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण बगद नदी और आसपास के भूजल स्रोत दूषित हो गए हैं। नाईपुरा, बसैली और शहबाजपुर डोर गांवों में पानी पीला, बदबूदार और अनुपयोगी हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी से बीमारियां बढ़ रही हैं, दुधारू पशुओं की मौत हो रही है और फसलें प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय किसानों की मांग पर जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स द्वारा डिप्टी कलेक्टर श्रीमती चंद्रकांता की अध्यक्षता में छह सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। इसी क्रम में नमामि गंगे और दिल्ली से आए विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर पानी और मिट्टी के नमूने एकत्र किए तथा ग्रामीणों से जानकारी ली। टीम ने जांच रिपोर्ट शासन को भेजने का आश्वासन दिया है।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चल रहा धरना शुक्रवार को 62वें दिन में प्रवेश कर गया। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि यह केवल पानी का संकट नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का प्रश्न है। उन्होंने युवाओं में बढ़ती 'इको एंजायटी' का जिक्र करते हुए कहा कि पर्यावरणीय असुरक्षा मानसिक तनाव और अवसाद को जन्म दे रही है। प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने आरोप लगाया कि इस गंभीर मुद्दे पर विधानसभा में अपेक्षित चर्चा नहीं हो रही है, जबकि मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
धरने में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भूजल की शुद्धि, प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर कार्रवाई और स्थायी समाधान सुनिश्चित नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित