बेंगलुरु , अप्रैल 08 -- मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के लिए जारी कई महत्वपूर्ण परीक्षणों के बीच अब यह मिशन घोषणाओं के दौर से निकलकर हकीकत बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
इसरो प्रमुख वी नारायणन के अनुसार, इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना सिर्फ रॉकेट लॉन्च करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बेहद जटिल प्रक्रिया है। इसमें उड़ान से पहले की तैयारियों से लेकर वापसी तक की हर बारीकी पर नजर रखनी होती है।
इसरो प्रमुख की टिप्पणी इस बात का संकेत देती है कि गैर-मानव मिशनों की तुलना में मानव मिशन के लिए सुरक्षा के मानक बहुत ऊंचे होते हैं। इसमें मशीनों और सॉफ्टवेयर के साथ-साथ इंसानी तालमेल को भी सटीक बनाना पड़ता है।
गगनयान के रोडमैप में जल्दबाजी के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले इसरो कई गैर-मानव मिशन अंतरिक्ष में भेजेगा। इनका मकसद रॉकेट की मजबूती, क्रू एस्केप सिस्टम (आपात स्थिति में बचने का तरीका) और लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच करना है।
इसरो प्रमुख ने बताया कि रॉकेट को छोड़ने में तो कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन असली चुनौती पूरे मिशन के दौरान उस पर नियंत्रण और तालमेल बनाए रखने की होती है। गगनयान भले ही कम समय का मिशन हो, लेकिन इसकी तैयारी मंगल और चंद्र मिशन जैसी ही कड़ी और व्यवस्थित है।
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