चेन्नई , अक्टूबर 24 -- देश के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन 'गगनयान' का पहला परीक्षण उड़ान अगले दो महीनों के भीतर आयोजित किया जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने शनिवार को यह घोषणा की।
यहां श्री रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के दीक्षांत समारोह के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एचएलएमवी 3 रॉकेट का उपयोग करके गगनयान-1 (जी1) के लिए पहला मानव रहित परीक्षण उड़ान दो महीने में श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से आयोजित किया जाएगा।
जी1 उड़ान एक मानव रहित परीक्षण मिशन है जो अर्ध-मानव रोबोट 'व्योममित्र' को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जाएगा। इसमें मानव-रेटेड एचएलएमवी 3 रॉकेट और स्वदेशी रूप से विकसित क्रू मॉड्यूल का उपयोग किया जाएगा।
अंतरिक्ष एजेंसी सभी प्रणालियों की वैधता साबित करने के लिए पहली परीक्षण उड़ान से पहले महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षण आयोजित करती रही है। इसरो ने भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर का उपयोग करके पैराशूट मंदी प्रणालियों का परीक्षण करते हुए दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट पूरा कर लिया है। इसके अलावा क्रू मॉड्यूल-सर्विस मॉड्यूल पृथक्करण परीक्षण, एपेक्स कवर पृथक्करण और क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम का परीक्षण भी पूरा किया जा चुका है।
पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन से पहले अतिरिक्त मानव रहित परीक्षण उड़ानें (ह्यूमनॉइड सहित) लॉन्च की जाएंगी। गगनयान परियोजना के तहत तीन सदस्यीय दल को 3 दिनों के मिशन के लिए 400 किमी की कक्षा में लॉन्च करके और उन्हें भारतीय समुद्री जल में सुरक्षित उतारकर पृथ्वी पर वापस लाकर मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करना है।
पहले मानव उड़ान मिशन की संभावित समयसीमा पर डॉ. नारायणन ने कहा कि इसकी घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा की जाएगी।
तमिलनाडु के तटीय थूथुकुडी जिले के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहे दूसरे अंतरिक्ष केंद्र (स्पेसपोर्ट) के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2029-30 से प्रति वर्ष 50 रॉकेट (प्रति सप्ताह एक रॉकेट) लॉन्च करने का लक्ष्य है, जिसके लिए अधिक लॉन्च पैड की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "वर्तमान में हमारे पास श्रीहरिकोटा में दो लॉन्च पैड हैं, जहां से पीएसएलवी और जीएसएलवी की लॉन्चिंग हो रही है। अब हमने दो और जोड़े हैं-एक कुलशेखरपट्टिनम, जो मुख्य रूप से छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों (एसएसएलवी) के प्रक्षेपण के लिए काम आएगा, और दूसरा (तीसरा लॉन्च पैड) श्रीहरिकोटा में। एक बार ये चारों लॉन्च पैड तैयार हो जाएं, तो हम प्रति वर्ष 50 रॉकेट भेज सकते हैं।"निजीकरण संबंधी जानकारियों को खारिज करते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि लॉन्च पैड निजी कंपनियों को सौंपे जाएंगे जो उनका संचालन करेंगी। इसका मतलब यह नहीं है कि इसे बेचा जा रहा है या निजीकरण किया जा रहा है।
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