जालंधर , अक्टूबर 23 -- कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष द्वारा अपने निलंबन को एकतरफा, त्रुटिपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार देते हुए फैसले पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने सदन में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से लगाए गए आरोपों को रिकॉर्ड से हटाने और उन्हें सदन को गुमराह करने के लिए फटकार लगाने की मांग की।

श्री खैरा ने अपने बयान में सवाल किया कि जब शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही में उनका कोई वक्तव्य दर्ज नहीं है और सदन के बीचोंबीच सभी विधायक नारेबाजी कर रहे थे, तो केवल उन्हें ही निलंबित क्यों किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या स्पीकर ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की।

उन्होंने कहा कि विधानसभा के बाहर सार्वजनिक मंचों पर उनके खिलाफ इस्तेमाल किए गए कथित अपमानजनक शब्दों के लिए उन्हें सदन से निलंबित नहीं किया जा सकता। श्री चीमा के आरोपों का जवाब देते हुए खैरा ने नशा माफिया से जुड़े होने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि फाजिल्का में उनके खिलाफ दर्ज कथित झूठे और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) मामले की कार्यवाही पर जून 2024 में उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी थी। उन्होंने 1986 में पुलिस गोलीबारी में निर्दोष लोगों की मौत से जुड़े एक पुलिस अधिकारी का भी जिक्र किया।

श्री खैरा ने कहा कि उक्त अधिकारी से उनका कोई संबंध नहीं है और सवाल किया कि यदि सरकार के पास उसके खिलाफ कार्रवाई के आधार हैं, तो पिछले पांच वर्षों में उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

श्री खैरा ने न्यायमूर्ति गुरनाम सिंह आयोग की रिपोर्ट का हवाला देने पर चीमा को चुनौती देते हुए रिपोर्ट सार्वजनिक करने और उस पर की गई कार्रवाई का ब्योरा देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित पुलिस अधिकारी के आम आदमी पार्टी के भुलत्थ क्षेत्र के हलका प्रभारी से करीबी संबंध हैं।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज श्री चीमा के कथित भ्रामक बयानों को हटाया जाना चाहिए और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मीडिया से निलंबन के मामले में उनका पक्ष भी प्रकाशित करने की अपील की।

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