फगवाड़ा , मार्च 24 -- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आरोप लगाया कि उनका "भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस" का बार-बार दोहराया जाने वाला दावा महज एक दिखावा है जिसमें कोई विश्वसनीयता नहीं है।

श्री खैरा ने मंगलवार को फगवाड़ा में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि नडाला में तैनात एक खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) के खिलाफ 20 लाख रूपये के कथित भ्रष्टाचार की शिकायत इस माह चार मार्च को सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस ब्यूरो) को औपचारिक रूप से सौंपी गई थी। यह मामला 2022 में ढिलवां में उनके पिछले कार्यकाल से संबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के सरकार के इरादे और प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा करती है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी को पिछली नियुक्तियों के दौरान निलंबन और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा था। श्री खैरा ने उन पिछले उदाहरणों का भी हवाला दिया जहाँ आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने ही पिछले वर्षों के दौरान इसी अधिकारी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों को उठाया था, जिसके बाद उस समय कार्रवाई हुई थी।

उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाक्रम भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने में सरकार की निरंतरता पर संदेह पैदा करते हैं और यह चयनात्मक कार्रवाई और राजनीतिक दोहरे मापदंडों के व्यापक स्वरूप को दर्शाता है।

अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के बीच कथित गठजोड़ पर चिंता जताते हुए श्री खैरा ने कहा कि यह स्थिति एक पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग करती है। उन्होंने तुरंत सतर्कता मामला दर्ज करने, जांच लंबित रहने तक अधिकारी को निलंबित करने और ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग से अधिकारी की बहाली के संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी घोषित नीति को कायम रखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्णायक कार्रवाई करने में विफलता सार्वजनिक विश्वास को कम करेगी और प्रशासनिक निष्क्रियता की धारणा को पुख्ता करेगी।

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