खैरागढ़-छुईखदान-गंडई , अक्टूबर 20 -- छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की जनपद पंचायत छुईखदान में तृतीय श्रेणी कर्मचारी को प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का प्रभार सौंपे जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। जनपद पंचायत के दो-तिहाई से अधिक निर्वाचित सदस्यों ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए प्रभारी सीईओ को हटाने की मांग की है। सदस्यों ने मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

जनप्रतिनिधियों से मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल द्वारा तृतीय श्रेणी कर्मचारी केश्वरी देवांगन को जनपद पंचायत का संपूर्ण प्रभार सौंपा गया है। सदस्यों ने इस व्यवस्था की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इससे पंचायत की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

मामले को लेकर 23 अक्टूबर को प्रस्तावित सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा की बैठकों से पहले विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

निर्वाचित सदस्यों ने आरोप लगाया है कि सामान्य प्रशासन समिति के निर्णयों को सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना निरस्त किया गया। इसके अलावा, आहरण एवं संवितरण अधिकारों, जनपद कार्यालय भवन में निर्माण कार्य, जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी तथा ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

सदस्यों का कहना है कि लगभग 25 वर्ष पुराने जनपद पंचायत कार्यालय भवन में कथित तौर पर बिना प्राक्कलन, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक अनुमति के तोड़फोड़ कर छत पर निर्माण कार्य कराया गया। उन्होंने जेम पोर्टल से खरीदी में कलेक्टर की आपत्तियों की अनदेखी करने और कुछ ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोके जाने का आरोप भी लगाया है।

वित्तीय प्रभार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों ने 27 मार्च, आठ अप्रैल और 17 सितंबर 2026 को जिला प्रशासन को लिखित आवेदन सौंपे थे। सदस्यों के मुताबिक, संचार एवं संकर्म स्थायी समिति की बैठकों में संबंधित नस्तियों का अवलोकन कराने से भी इनकार किया गया। इस मामले में प्रभारी सीईओ को निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किए जाने का दावा भी किया गया है।

इसके अतिरिक्त, 15वें वित्त आयोग की राशि को पुनर्स्थापित करने, जनमन योजना के तहत अधूरे आंगनबाड़ी भवन के पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने और गार्बेज रिक्शा खरीदी के सत्यापन में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विवाद के बीच निर्वाचित सदस्यों ने आगामी बैठकों के दौरान संभावित विवाद और कार्रवाई को लेकर आशंका जताई है। सदस्यों ने मांग की है कि 23 अक्टूबर को होने वाली दोनों बैठकों की शुरुआत से लेकर समापन तक वीडियोग्राफी कराई जाए तथा जिला प्रशासन के किसी सक्षम राजपत्रित अधिकारी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाए।

सदस्यों ने पूर्व में एक जनपद सदस्य के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कराए जाने की घटना का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, संबंधित सदस्य को सर्वोच्च न्यायालय और विचारण न्यायालय से राहत मिल चुकी है। इसी पृष्ठभूमि में सदस्यों ने बैठकों की कार्यवाही पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने की मांग की है।

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