रायपुर , अप्रैल 03 -- छह बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता एमसी मैरी कॉम और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने शुक्रवार को कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स प्रतिभा और उत्कृष्टता के बीच की खाई को पाट सकते हैं। आज यहां खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मैरी कॉम और बाइचुंग भूटिया ने जमीनी स्तर पर निवेश और संरचित विकास प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए दोनों दिग्गज खिलाड़ियों ने कहा कि भारतीय परिवारों को बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से दूर रखने और उन्हें विभिन्न खेलों का अनुभव लेने के लिए मैदान में भेजने की जरूरत है।
भारतीय फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित खिलाड़ियों में से एक भूटिया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (केआईबीजी) जैसे पहल एक मजबूत शुरुआत जरूर हैं, लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए देश में खेलों की बुनियाद को और मजबूत करना बेहद जरूरी है। अपने करियर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस समय जब खेल ढांचा अभी विकसित हो रहा था, तब भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने युवा खिलाड़ियों को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
भूटिया ने कहा, "मैं साई का प्रोडक्ट रहा हूं। 1986 के पहले बैच का साई प्रोडक्ट। जमीनी स्तर पर निवेश करना बहुत जरूरी है, लेकिन हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं और केवल शीर्ष स्तर पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं।"वह कहते हैं, "आदिवासी समुदायों में स्वाभाविक रूप से खेल प्रतिभा बहुत अधिक होती है, और हमने इसे खासकर पूर्वोत्तर भारत में साफ तौर पर देखा है, जहां से कई खिलाड़ियों ने भारत का शानदार प्रतिनिधित्व किया है और हमें विश्व मंच पर पहुंचाया है। युवाओं को मंच देना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में आदिवासी समुदायों से और भी अधिक खिलाड़ी उभरकर सामने आएंगे। यह तो बस शुरुआत है, आने वाले वर्षों में हम आदिवासी पृष्ठभूमि से और भी ज्यादा प्रतिभा देखेंगे।"भूटिया ने यह भी बताया कि किसी खिलाड़ी के विकास में माहौल और अवसर की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और अपने शुरुआती दिनों को याद किया।
उन्होंने कहा, "देखिए, जब मैं अपने बारे में बात करता हूं, तो हमेशा कहता हूं कि जब आप पूर्वोत्तर से होते हैं, तो आप दो ही चीजें करते हैं।फुटबॉल या संगीत। यही मेरा माहौल था। बचपन में मेरे आसपास के बच्चे कोई और खेल नहीं खेलते थे। सिक्किम में हर गांव और हर कस्बे में फुटबॉल एक संस्कृति की तरह था।"उनके विचारों से सहमति जताते हुए मैरी कॉम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (केआईटीजी) की सराहना की और इसे एक परिवर्तनकारी पहल बताया, जो लंबे समय से चली आ रही अवसर और जागरूकता की कमी को दूर कर सकती है।
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