मोहाली , अक्टूबर 21 -- पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने बुधवार को मटौर गांव में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता में शिरकत कर पहलवानों का उत्साहवर्धन किया।

उन्होंने युवाओं में खेलों को बढ़ावा देने और पंजाब की पारंपरिक कुश्ती को प्रोत्साहित करने के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी।

श्री सिद्धू ने कहा कि कुश्ती पंजाब की समृद्ध विरासत और पारंपरिक खेल संस्कृति का अभिन्न अंग है। यह युवाओं में शारीरिक मजबूती, अनुशासन, मेहनत और खेल भावना विकसित करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी प्रतियोगिताएं आयोजित करने से युवा खेलों से जुड़ते हैं और उन्हें नशे से दूर रखने में मदद मिलती है। उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में नशे की समस्या गंभीर बनी हुई है और सरकारें इसकी जड़ों पर प्रहार करने में विफल रही हैं।

गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर हेरोइन की बड़ी खेप पकड़े जाने के मामलों का उल्लेख करते हुए सिद्धू ने कहा कि गुजरात और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार है। इसके बावजूद बंदरगाहों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने नशा तस्करी के नेटवर्क की पारदर्शी जांच, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

मानसा के परविंदर सिंह झोटा और गुलजार सिंह सहित नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों से जुड़े मामले गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने शेरों गांव के मोहंजीत सिंह के साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार है।

श्री सिद्धू ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब को नशामुक्त बनाने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन नशे की समस्या अब भी राज्य के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई है। नशाविरोधी अभियान केवल विज्ञापनों और बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सरकार को तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने, नशे की लत से प्रभावित युवाओं के पुनर्वास और नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने मटौर में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि गांवों में खेल प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहित करने, खेल मैदानों का विकास करने और युवाओं को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने से पंजाब की खेल विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित किया जा सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित