नयी दिल्ली , दिसंबर 09 -- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एम एल जाट ने मंगलवार को कहा कि देश की खेती को सब्सिडी-आधारित मॉडल से हटकर 'तकनीक वाली, और बाजार में उतरने के लिए तैयार वाले नजरिए' की तरफ आगे बढ़ना चाहिए।
श्री जाट ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात रखी। उन्होंने जोर दिया कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके कौशल को मजबूत करने, वेल्यू चेन सुधारने और सब्सिडी पर निर्भरता कम करने की जरुरत है। यह बदलाव एक आत्मनिर्भर भारत के मकसद को पाने में अहम है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की खेती आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर निर्भर करेगी। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि सब्सिडी अक्सर अक्षमता को बढ़ावा देती है, इसलिए ऐसे में हमें दक्षता को पहचानने पर जोर देना होगा। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके जैविक स्रोतों और स्वयं की बनायी खाद पर ध्यान देने को कहा। ऐसा करने से न केवल मिट्टी की सेहत में इजाफा होगा बल्कि काश्तकार की लागत भी कम होगी।
उन्होंने संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसानों को सीधे बाजारों से जोड़ना चाहिए ताकि वे बेहतर दाम हासिल कर सकें और मांग को तेजी से समझ सकें। उन्होंने कहा कि कृषि उद्योगों को विकसित करने और खास खेती के क्षेत्रों को बनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं में स्थिरता आ सकती है, और मजबूत वेल्यू चेन ये एमएसपी जैसे चीज की जरूरत घट जाएगी।
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