बैतूल , मार्च 26 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के खेड़ी रामोसी प्रकरण में 32 आदिवासी परिवारों के लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है।
युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव जितेंद्र सिंह इवने ने राज्य सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ही परिवार से जुड़े 32 लोगों पर एक साथ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जाना चिंताजनक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का उपयोग कर आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही कुछ नेताओं द्वारा जमीन खरीदने के प्रयास और विरोध करने पर प्रशासनिक दबाव बनाए जाने की बात भी कही।
इवने ने सरकार के आदिवासी हितैषी होने के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है और वन अधिकार कानून के तहत पात्र लोगों को पट्टे नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने वन विभाग द्वारा आदिवासियों की जमीन पर कब्जे के आरोप भी लगाए।
उन्होंने जिले में आदिवासी समाज के खिलाफ बढ़ते अत्याचार और भूमि विवादों में न्याय न मिलने पर चिंता जताई। साथ ही आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने और योजनाओं के दुरुपयोग के मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती।
इवने ने आदिवासी महिलाओं और युवाओं से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे भय का माहौल बन रहा है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
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