नयी दिल्ली , अक्टूबर 12 -- खाने-पीने की चीजों के साथ परिवहन और ईंधन की महंगाई से सितंबर में उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर यानी खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह अगस्त में 4.83 प्रतिशत और जुलाई में 4.5 प्रतिशत रही थी।

इस दौरान खाद्य खुदरा महंगाई अगस्त के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे रिजर्व बैंक की पिछले सप्ताह जताई गई आशंका सही साबित हुई है। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति बयान में कहा था कि पश्चिम एशिया युद्ध के प्रभावों का दूसरे चक्र का असर अब दिखने लगा है। उसने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-अगस्त 2026) में खुदरा महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। पूरे वित्त वर्ष के लिए उसने मुद्रास्फीति 5.2 प्रतिशत रहने की बात कही है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, एक बार फिर शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा दिखी। शहरी इलाकों में मुद्रास्फीति की दर 4.88 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 6.08 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में खुदरा खाद्य महंगाई 8.06 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 7.18 प्रतिशत रही।

सालाना आधार पर सितंबर में प्याज की औसत कीमत एक साल पहले के मुकाबले 108 प्रतिशत, चांदी के गहनों की 88 प्रतिशत, अदरक की 63 प्रतिशत, लहसून की 55 प्रतिशत और नींबू की 36 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, आलू 12 प्रतिशत, टमाटर नौ प्रतिशत, मोटर वाहन पांच प्रतिशत और भिंडी तथा नारियल चार-चार प्रतिशत सस्ता हुआ है।

चीनी की कीमत 29.80 फीसदी बढ़ी। फलों एवं सब्जियों के दाम में 10.75 प्रतिशत की वृद्धि हुई। चावल की कीमत 8.25 प्रतिशत, मांस की 8.71 प्रतिशत और अंडों की 8.66 प्रतिशत बढ़ी। दूध के दाम 4.21 फीसदी, पनीर के 4.66 प्रतिशत और तेल एवं अन्य वसा युक्त उत्पादों के 8.35 प्रतिशत बढ़े।

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