जालौन , सितंबर 10 -- बुंदेलखंड के जालौन जिले के कदौरा विकासखंड के खुटमिली गांव में कभी गर्मियों में पेयजल के लिए कुओं, टैंकरों और हैंडपंपों पर लंबी कतारें लगती थीं, लेकिन अब नमामि गंगे एवं जल जीवन मिशन की 'हर घर जल' योजना से गांव की तस्वीर बदल रही है। करीब 1800 परिवारों की आबादी वाले गांव में लगभग 200 घरों में नल कनेक्शन हो चुके हैं और अधिकांश घरों तक नल से पानी पहुंच रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार गर्मी शुरू होते ही गांव में पेयजल संकट गहरा जाता था। अधिकांश हैंडपंपों का पानी खारा होने के कारण लोग पीने के पानी के लिए दो कुओं और कुछ चुनिंदा हैंडपंपों पर निर्भर रहते थे। गर्मी बढ़ने पर कई हैंडपंप जवाब दे जाते थे, जिसके चलते ग्राम पंचायत को तीन-चार महीने तक टैंकरों से पेयजल आपूर्ति करनी पड़ती थी। टैंकर पहुंचने पर पानी भरने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लग जाती थी और कई बार रात तक इंतजार करना पड़ता था।
ग्रामीण बताते हैं कि कई बार हालात इतने खराब हो जाते थे कि कुओं के कीचड़ और कीड़ेयुक्त पानी को छानकर इस्तेमाल करना पड़ता था। नहाने, कपड़े धोने और अन्य घरेलू कामों के लिए भी तालाब के पानी पर निर्भरता रहती थी। पानी जुटाने में घंटों लगने से मजदूरी के साथ बच्चों, विशेषकर लड़कियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी।
ग्राम प्रधान जयराम ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने के बाद ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। वर्ष 2022 से गांव में टैंकर से पेयजल आपूर्ति कराने की जरूरत नहीं पड़ी है। इससे ग्रामीणों को राहत मिलने के साथ ग्राम पंचायत को हर वर्ष टैंकरों पर होने वाले हजारों रुपये के खर्च की भी बचत हुई है।
राज्य सरकार के स्वच्छ स्वजल शक्ति सम्मान से सम्मानित तथा ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समिति से जुड़ी मीना शुक्ला ने बताया कि पहले हैंडपंपों पर पानी भरने के लिए घंटों कतार लगती थी और गर्मियों में कई हैंडपंप पानी देना बंद कर देते थे। टैंकर पहुंचते ही पानी लेने के लिए भीड़ उमड़ पड़ती थी। अब घर में नल कनेक्शन होने से यह परेशानी काफी कम हो गई है।
गांव की आकांक्षा, नीलम, गंगा देवी और अनीता समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि पहले तालाब के पानी से कपड़े और अनाज धोने सहित कई घरेलू काम करने पड़ते थे। पीने के पानी की व्यवस्था में भी काफी समय चला जाता था। घर में नल पहुंचने से समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार साफ पानी मिलने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में भी कमी महसूस हो रही है।
पेयजल परीक्षण से जुड़ी मीना शुक्ला और नीतू ने बताया कि अब गांव में पीने के पानी की जांच साल में दो बार की जाती है। पहले ग्रामीणों को पानी की गुणवत्ता जांचने की जानकारी नहीं थी। जल जीवन मिशन के जागरूकता कार्यक्रमों के बाद उन्हें पानी की गुणवत्ता और जांच के महत्व की जानकारी मिली।
ग्रामीण माधव, जानेन्द्र कुमार और चन्द्रेश ने बताया कि वर्ष 2021-22 से घर तक नल से पानी पहुंचने के बाद रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। अब कुओं और टैंकरों पर निर्भरता नहीं रही। घर में नल खोलने पर पानी मिलने से महिलाओं का समय बचता है और बच्चों को पढ़ाई के लिए भी अधिक समय मिल रहा है।
जनपद में जल के मुद्दे पर काम कर रहे यूनोप्स के जिला सलाहकार देवेंद्र गांधी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में घर तक नल से पेयजल पहुंचना महज सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में बदलाव का माध्यम है। इससे महिलाओं को पानी भरने के काम में रोजाना औसतन एक से डेढ़ घंटे की बचत हो रही है।
जल निगम (ग्रामीण) की अधिशासी अभियंता अंचल गुप्ता ने बताया कि जनपद जालौन में दो कंपनियां काम कर रही हैं। जिन ग्राम पंचायतों में कार्य चल रहा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। पेयजल संकट वाले गांवों में प्राथमिकता से कार्य कराया जा रहा है। खुटमिली में भी प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराया गया है और शेष कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा।
जल जीवन मिशन के तहत यूनोप्स की ओर से किए जा रहे सामुदायिक जागरूकता प्रयासों को समझने के लिए संबंधित टीम करीब तीन वर्ष पहले डेनमार्क का दौरा भी कर चुकी है। इन प्रयासों के माध्यम से ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल, पानी की गुणवत्ता जांच और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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