नयी दिल्ली , जुलाई 13 -- रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सोमवार को फिल्म सतलुज की रिलीज का विरोध करने के सरकार के फैसले का बचाव किया और कहा कि यह आपत्ति मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा या उनकी विरासत के खिलाफ नहीं थी, बल्कि फिल्म में चित्रित झूठी कहानियों और तथ्यात्मक अशुद्धियों के खिलाफ थी।

श्री बिट्टू ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य के अतीत के बारे में भ्रामक बातें पेश करके पंजाब में विभाजन पैदा करने की बार-बार कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के रुख का उद्देश्य पंजाब की सामाजिक सद्भाव की रक्षा करना और हिंदुओं तथा सिखों के बीच लंबे समय से चले आ रहे बंधन को संरक्षित करना है। दोनों समुदायों की साझा सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "दो रंग गुरु दा - एक होला, एक होली।"इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि देश के भीतर कुछ तत्वों के साथ बाहरी ताकतें विभाजनकारी कथाओं को बढ़ावा देने और पंजाब में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों की तस्वीरों के साथ प्रमुख सिख हस्तियों की तस्वीरें प्रदर्शित कीं, जिसमें कहा गया कि इसका उद्देश्य सिख आइकन और हिंसा में शामिल लोगों के बीच अंतर को रेखांकित करना है।

सतलुज की कहानी का उल्लेख करते हुए श्री बिट्टू ने आरोप लगाया कि फिल्म में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह, पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल, सिख समुदाय और पंजाब में आतंकवाद के दौरान हताहतों की संख्या का गलत चित्रण किया गया है। उन्होंने लोगों से फिल्म में किए गए दावों को स्वीकार करने के बजाय आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच करने और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के पास उपलब्ध जानकारी सहित सत्यापित डेटा पर भरोसा करने का आग्रह किया।

श्री बिट्टू ने पंजाब में अशांत अवधि के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की वास्तविक संख्या निर्धारित करने के लिए एक आयोग के गठन की जसवन्त सिंह खालरा की पत्नी द्वारा उठाई गई मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच और साक्ष्य आधारित प्रक्रिया से सच्चाई सामने आनी चाहिए।

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