चंडीगढ़ , जून 05 -- पंजाब राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष बाल मुकंद शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि पोषण वाटिकाएं केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन्हें स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर बच्चों को पोषण, टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा के बारे में व्यावहारिक ज्ञान दिया जाना चाहिए।

श्री शर्मा ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राज्यभर में स्कूलों में विकसित की जा रही पोषण वाटिकाओं, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम -2013 के प्रति जागरूकता अभियानों की प्रगति का जायजा लिया गया। बैठक में सरकारी स्कूलों में स्थापित पोषण वाटिकाओं की स्थिति और उनके प्रभाव की समीक्षा की गयी।

श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि मिड-डे मील योजना के तहत रसोईघरों की नियमित सफाई, रखरखाव और भोजन तैयार करने वाले रसोइयों के प्रशिक्षण को सुनिश्चित किया जाये, ताकि बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके।

बैठक के दौरान स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम की भी समीक्षा की गयी। इसमें स्वास्थ्य जांच, बच्चों की वृद्धि निगरानी और स्वच्छता संबंधी उपायों पर चर्चा हुई। आयोग ने कुपोषण की शुरुआती पहचान और उसके समाधान के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत मिलने वाले लाभों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), शिकायत निवारण तंत्र और खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए चलाये जा रहे अभियानों की भी समीक्षा की गयी। आयोग ने कहा कि पंचायत संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, ताकि पात्र लाभार्थी अपने अधिकारों और योजनाओं का पूरा लाभ उठा सकें।

अध्यक्ष ने जिला स्तरीय अधिकारियों को सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों को और तेज करने तथा स्थानीय मीडिया, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर जिला स्तर पर हर महीने समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। उन्होंने घोषणा की कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शीर्ष तीन स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

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