दरभंगा , जुलाई 17 -- बिहार के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (लनामिविवि) के पूर्व कुलपति प्रो.एस.एम. झा ने कहा कि आज वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज पहले की अपेक्षा अधिक मजबूत हुई है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए आज भी रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।प्रो.झा ने कहा कि कहा कि भविष्य में यदि खाड़ी क्षेत्र में कोई बड़ा संघर्ष होता है, तो भारत के समक्ष अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की चुनौती होगी।
स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग एवं डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "खाड़ी संकट और भारतीय विदेश नीति" विषयक एक दिवसीय सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रो. झा ने कहा कि खाड़ी संकट के दौरान चीन ने प्रत्यक्ष मध्यस्थता का प्रयास नहीं किया और न ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि चीन अपने दीर्घकालिक रणनीतिक हितों पर केंद्रित है तथा 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई)' के माध्यम से अनेक देशों के साथ अपने आर्थिक और सामरिक संबंध मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी युवा आबादी को मानव पूंजी के रूप में विकसित कर राष्ट्रीय शक्ति में बदलने की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए।
सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि खाड़ी संकट ने ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक, महंगाई, रक्षा उपकरणों की उपलब्धता, आधुनिक तकनीक तथा रोजगार जैसे अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में कार्यरत हैं और विदेश से आने वाले प्रेषण (रेमिटेंस) में उनका लगभग 40 प्रतिशत योगदान है। ऐसे में भारत के लिए सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित एवं मधुर संबंध बनाए रखना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि भारत के अरब देशों, इज़रायल, अमेरिका और ईरान सभी के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक एवं आर्थिक हित जुड़े हैं। इसलिए भारत की विदेश नीति संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री, ऊर्जा, पूंजी, तकनीक, हथियार और रोजगार जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र को अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता सुदृढ़ करनी होती है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में स्वतंत्र और व्यावहारिक नीति अपनानी चाहिए।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण डॉ. रघुबीर रंजन ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी नितीश नायक ने किया। इस अवसर पर डॉ. नीतू कुमारी, डॉ. मनोज कुमार, अनिल कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित थे।
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