नागोया , अक्टूबर 04 -- खराब सेहत के कारण रिजेक्ट होने के बाद तीरंदाजी में कामयाबी हासिल करने वाली स्वर्ण पदक विजेता भारतीय महिला रिकर्व टीम की सदस्य कीर्ति शर्मा के मजबूत इरादे के साथ आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए अपनी सफलता की कहानी लिखी।
कीर्ति शर्मा, अंकिता भगत और कुमकुम मोहोद की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में मजबूत दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस तरह भारतीय तिकड़ी ने एशियन गेम्स में इस इवेंट पर दक्षिण कोरिया के 44 साल के दबदबे को खत्म कर दिया।
हर दूसरे खेल की तरह, एशियन गेम्स में महिला रिकर्व टीम इवेंट में भारत की जीत का भी हरियाणा से कनेक्शन है, और वह कनेक्शन कीर्ति शर्मा हैं। ग्रामीण हरियाणा के पुरुष-प्रधान माहौल में एक किसान परिवार में जन्मी कीर्ति को रिटौली जैसे छोटे से गांव से एशियन गेम्स में कामयाबी तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
कीर्ति ने जापान के आइची-नागोया से साई मीडिया को बताया, "बचपन से ही मेरी सेहत ठीक नहीं रहती थी। मुझे कई लोगों से ऐसी बातें सुननी पड़ती थीं जिनमें मेरी तीरंदाजी में बड़ा नाम बनाने की काबिलियत पर शक किया जाता था। चूंकि मैं शारीरिक रूप से फिट नहीं थी, इसलिए शुरू में मेरे लिए भारी पाउंडेज वाले धनुष उठाना भी मुश्किल होता था। लेकिन मैंने ठान लिया था कि अपने आलोचकों को गलत साबित करने के लिए जो कुछ भी करना पड़े, मैं करूंगी।"आखिरकार उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया, जब भारतीय तिकड़ी ने ओकाज़ाकी चुओ सोगो पार्क में एक रोमांचक फ़ाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराया। 19 साल की कीर्ति ने मुश्किल समय में साथ देने और अपनी सफलता की नींव रखने का श्रेय अपने परिवार, खासकर अपने पिता विजय शर्मा को दिया।
कीर्ति ने कहा, "मेरे पिता एक किसान हैं। लेकिन उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया है और आर्थिक तंगी के बावजूद मेरे स्पोर्ट्स करियर से जुड़े सभी खर्च उठाए हैं। कई लोगों ने मेरे पिता से कहा कि उन्हें मुझे स्पोर्ट्स में नहीं जाने देना चाहिए क्योंकि मैं एक लड़की हूं। उन्होंने मेरी खराब सेहत की वजह से मेरे सफल होने पर भी शक जताया। लेकिन मेरे पिता को हमेशा मुझ पर भरोसा रहा है।"हजारीबाग के साई प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग लेने वाली स्टार आर्चर ने कहा कि एशियन गेम्स में कामयाबी का रास्ता बनाने का सारा श्रेय साई और उनके कोच उद्धव सिंह को जाता है।
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