खरगोन , जुलाई 29 -- मध्यप्रदेश के खरगोन की एक अदालत ने वर्ष 2022 के रामनवमी हिंसा प्रकरण में साक्ष्यों के अभाव में 11 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा।
अदालती सूत्रों के अनुसार चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश नाथ ने 27 जुलाई को सुनाए निर्णय में इबादत अली, सादिक खान, अब्दुल्ला खान, साहब उर्फ शाहिब, शेर यार, फैसल खान, आजम खान, शब्बीर खान, इमरान अली, मुश्ताक अली और राजिक अली को बलवा, आगजनी तथा अन्य आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। सभी आरोपी खरगोन शहर के कलाली मोहल्ला, कलाली कुआं और मियांमान मोहल्ला क्षेत्र के निवासी हैं।
अभियोजन के अनुसार 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी जुलूस के दौरान हुई हिंसा में आरोपियों ने भटवाड़ी मोहल्ले में कई मकानों पर पथराव किया तथा कथित रूप से पेट्रोल बम फेंककर आगजनी की। आरोप था कि घटना में मकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया तथा कुछ आरोपियों ने सीसीटीवी डीवीआर और आभूषण भी चोरी किए।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन ने कुल 13 गवाह पेश किए, जिनमें से दो प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे। शेष 11 प्रत्यक्षदर्शियों में से आठ किसी भी आरोपी की पहचान नहीं कर सके। तीन गवाह एक ही परिवार के सदस्य थे, जिनके बयानों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए।
निर्णय में कहा गया कि किसी मामले में गवाहों की संख्या नहीं, बल्कि उनके साक्ष्य की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। अदालत ने इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्णय वडिवेलु थेवर बनाम स्टेट ऑफ मद्रास का भी उल्लेख किया। अदालत ने यह भी पाया कि एक प्रमुख गवाह की पहचान परेड नहीं कराई गई और उसका बयान घटना के 51 दिन बाद दर्ज किया गया, जिसकी देरी का संतोषजनक कारण अभियोजन प्रस्तुत नहीं कर सका।
फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि कथित पेट्रोल बम की कांच की बोतलों के टुकड़े और जले हुए पदार्थ की जांच में राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला को पेट्रोल, डीजल अथवा केरोसिन जैसे ज्वलनशील पदार्थों के अवशेष नहीं मिले।
अपर लोक अभियोजक युवराज गुजराती ने बताया कि अदालत ने घटना का वीडियो बनाने और न्यायालय में निर्भीकता से बयान देने के लिए एक गवाह के साहस की सराहना की है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 की रामनवमी हिंसा से जुड़े 20 से अधिक अन्य मामले अभी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। इस हिंसा में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी सहित कई लोग घायल हुए थे, जबकि एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद शहर में 24 दिन तक कर्फ्यू लागू रहा था और प्रशासन ने आरोपियों से जुड़े कथित अतिक्रमणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की थी।
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