पटना , जून 17 -- िहार सरकार की मंत्रिपरिषद ने राज्य में खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं सतत प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है। इन निर्णयों से एक ओर बालू संसाधनों के वैज्ञानिक आकलन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पत्थर खनन पट्टों के संचालन में तेजी आएगी तथा राज्य को राजस्व प्राप्ति के साथ-साथ निर्माण कार्यों के लिए पत्थर की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

मंत्रिपरिषद् ने राज्य की पांच प्रमुख नदियों सोन, किऊल, फल्गू, मोरहर एवं चानन का पुनर्भरण अध्ययन कराने के लिये 2,32,69,600 की स्वीकृति प्रदान की है। यह अध्ययन नामांकन के आधार पर सेन्ट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।

मंत्रिपरिषद् ने अनुमोदित जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन में चिन्हित पत्थर खनन भूखंडों की नीलामी से पूर्व खनन योजना तैयार कराने तथा पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने हेतु बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड को नामित एजेंसी बनाए जाने की भी स्वीकृति प्रदान की है।

वर्तमान व्यवस्था में खनन योजना अनुमोदन एवं पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने में लगभग 250 से 300 दिनों का समय लग जाता है। इसके अतिरिक्त, ई-नीलामी के बाद उच्चतम डाकदाता द्वारा विभिन्न चरणों में समय पर आवेदन नहीं किए जाने के कारण भी पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने में विलंब होता है, जिससे खनन कार्य प्रारंभ होने में देरी होती है।

नई व्यवस्था के तहत बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड आवश्यक स्वीकृतियों के उपरांत नीलामी से पूर्व ही खनन योजना तैयार करा सकेगा तथा पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त कर सकेगा। इससे नीलामी के बाद खनन कार्य अपेक्षाकृत कम समय में प्रारंभ हो सकेंगे।

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