रायपुर , अगस्त 16 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 का विरोध करते हुए रविवार को कहा कि इससे खनिज संपदा पर कर लगाने के राज्यों के अधिकार सीमित होंगे और छत्तीसगढ़ जैसे खनिज उत्पादक राज्यों के आर्थिक हित प्रभावित होंगे।

श्री बैज ने ये आरोप लगाया कि संसद में पारित संशोधन राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों पर कर अथवा उपकर लगाने की शक्तियों को सीमित करता है और खनिजयुक्त भूमि के संबंध में केंद्र के अधिकारों को बढ़ाता है। उन्होंने इसे राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे के विरुद्ध बताया।

उन्होंने कहा कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम-1957 में प्रमुख और गौण खनिजों को लेकर केंद्र एवं राज्यों की भूमिका निर्धारित रही है। नए संशोधन के बाद राज्य केंद्र द्वारा निर्धारित सीमाओं से इतर खनिज अधिकारों अथवा खनिजयुक्त भूमि पर अतिरिक्त कर या लेवी नहीं लगा सकेंगे। उन्होंने दावा किया कि इससे छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्वायत्तता और राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में भी ग्रामसभाओं की आपत्तियों की अनदेखी कर निजी खनन कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया है। उन्होंने नंदराज पर्वत, हसदेव, तमनार, धरमजयगढ़, रायगढ़, मैनपाट, बैलाडीला, बचेली, किरंदुल, कांकेर और बीजापुर का उल्लेख करते हुए कहा कि खनन से जुड़े निर्णयों में स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

श्री बैज ने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के तहत भूमि राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उन्होंने दावा किया कि यह संशोधन उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2024 के उस फैसले के प्रभाव को सीमित करने के उद्देश्य से लाया गया है, जिसमें राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल जैसे खनिज उत्पादक राज्यों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

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