कोच्चि , मार्च 19 -- कोच्चि के अमृता अस्पताल के चिकित्सकों ने खतरनाक आनुवंशिक बीमारी 'एक्यूट इंटरमिटेंट पोरफाइरिया' से जूझ रहे एक पांच वर्षीय बच्चे का सफलता पूर्वक इलाज किया है।

खतरनाक मेटाबोलिक बीमारी से जूझ रहे मालदीव के इस बच्चे का तीन महीनों तक गहन उपचार चला, जिसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया है।

मालदीव में एक सर्जरी के बाद बच्चे के अंदर गंभीर जटिलताएं विकसित होने लगी थीं, जिसके बाद उसे 13 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा एक्यूट एन्सेफैलोपैथी से पीड़ित था जिससे उसे बार-बार दौरे पड़ते थे और इस वजह से उसका मस्तिष्क प्रभावित हो रहा था। साथ ही शरीर में फ्लैसिड पैरालिसिस (शिथिल पक्षाघात) भी था। सांस लेने में सहायता के लिए उसे ट्रेकियोस्टोमी पर भी रखा गया था।

उपचार के दौरान, बच्चे को हेमिन दिया गया, जो एक महंगी और जीवन रक्षक दवा है जिसे आपातकालीन आधार पर आयात करना पड़ा था।

पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. विनयन के.पी., डॉ. वैशाख आनंद और डॉ. आज़मी हबीब के साथ पीडियाट्रिक गहन चिकित्सा इकाई के डॉ. सजित केशवन के नेतृत्व में एक बहु-विषय टीम ने इस मामले को संभाला। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप बच्चे की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

बाद में डॉक्टरों ने ट्रेकियोस्टोमी हटा दी क्योंकि बच्चे ने स्वतंत्र रूप से सांस लेने की क्षमता हासिल कर ली थी। अब वह सामान्य रूप से खाने में सक्षम है।

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