देहरादून , अप्रैल 07 -- उत्तराखंड के भाषा विभाग के मंत्री खजान दास ने मंगलवार को विधान सभा स्थित सभागार में विभागीय समीक्षा करते हुए प्रशंसा की कि राजभाषा हिन्दी, राज्य की क्षेत्रीय बोलियों को विकसित करने एवं उर्दू, पंजाबी भाषाओं को संवर्द्धित करने, प्राचीन साहित्य को संरक्षित रखते हुए विश्व स्तरीय सम्मानित एवं सर्वाधिक प्रचलित एवं प्रयोग में लाई जाने वाली भाषाओं के समकक्ष लाने के लिए अच्छा काम कर रहा है।

श्री दास ने विभाग के कार्यों की विस्तार से जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को विभिन्न बिन्दुओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को चाहिए कि वे और बेहतर कार्य करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सपनों के अनुसार नवाचार पर अधिक बल दें। प्रदेश के युवा एवं बाल साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किये जाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभाग के अंतर्गत किये जाने वाले कार्यों को बजट का बढ़ाया जाना अति आवश्यक है, लिहाजा सम्बन्धित अधिकारी विभाग के ढांचे, विभाग के अंतर्गत होने वाले प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन, भाषा अध्ययन केन्द्रों की स्थापना, पुस्तक मेलों के आयोजन, साहित्य ग्राम की स्थापना, साहित्य कल्याण कोष एवं बुजुर्ग साहित्यकारों को पेंशन योजना से आच्छादित करने के लिए बजट प्रस्ताव तैयार करें।

श्री दास ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश के गढ़वाल, कुमांऊ एवं जौनसार बावर क्षेत्र में विभिन्न अवसरों पर होने वाले पौराणिक गायनों का अभिलेखियकरण एवं दस्तावेजीकरण अति आवश्यक है। इसलिए अधिकारी जौनसार बावर क्षेत्र में पौराणिक काल से प्रचलित पंडवाणी गायन बाकणा, जो विलुप्ति के कगार पर है, सहित गढ़वाल एवं कुमांऊ के प्रचलित पौराणिक गायनों के अभिलेखिकरण एवं दस्तावेजीकरण को संबंधित क्षेत्रों में आयोजित होने वाले मेलों व कार्यक्रमों में जाकर स्थलीय निरीक्षण करें।

मंत्री ने कहा कि दीर्घकालीन साहित्यिक योगदान एवं साहित्य सेवा के लिए साहित्यकारों को दिया जाने वाला दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान आगामी समय में प्रदेश के अधिक से अधिक पात्र साहित्यकारों को दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि भाषा संस्थान की साधारण सभा के गठन को प्रदेश के जिन जनपदों से संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा साहित्यकारों के नाम नहीं दिये गये हैं, उनसे पुनः पत्राचार कर साहित्यकारों के नाम मांगे जाएं।

इस अवसर पर भाषा विभाग से सचिव उमेश नारायण पाण्डेय, अपर सचिव मायावती डकरियाल, निदेशक जसविन्दर कौर एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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